‘यही वजह है कि जहां भार अधिक होता है’ निदेशक (वाणिज्य) पावर कार्पोरेशन प्रशांत वर्मा ने बताया कि किसी स्थान पर 400 केवी का ट्रांसफार्मर लगा है और वहां भार बढ़ गया तो ट्रांसफार्मर जल जाएगा। यही वजह है कि जहां भार अधिक होता है उसे बढ़ाकर फिर उसी हिसाब से संसाधन का इंतजाम किया जाता है। जब उपभोक्ता भार घटाने के लिए आवेदन देते हैं तो उसकी पड़ताल कराई जाती है। यदि मांग सही पाई गई तो भार कम भी किया जाता है। सिक्योरिटी राशि पर ब्याज भी दिया जाता है। ‘सूचना देने के बाद ही बढ़ाने का नियम’ विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि भार बढ़ाने के नाम पर पावर कार्पोरेशन और बिजली कंपनियां मनमानी कर रही हैं। बिना सूचना दिए सिर्फ स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं का भार बढाया जा सकता है। अन्य को सूचना देने के बाद ही बढ़ाने का नियम है। पावर कार्पोरेशन अपने साफ्टवेयर में बदलाव करे। जिस तरह से अपने आप भार बढाया जाता है, उसी तरह से भार घटाने का भी प्रावधान हो। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। क्या है फिक्स चार्ज …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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