श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कमान पूरी तरह से चंपत राय के हाथों में थी। जैसा वह चाहते थे, वही होता था, लेकिन एसआईटी जांच में उनका कहीं पर भी जिक्र नहीं है। उसकी एक बड़ी वजह यह है कि लिखापढ़ी में ऐसे किसी भी दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर नहीं मिले, जिससे प्रकरण में उनका नाम आ सके। ऐसे सभी कार्य डॉ. अनिल मिश्रा ही देखते थे। लिहाजा अनिल मिश्रा तो नप गए, लेकिन अब तक चंपत राय तक जांच की आंच नहीं पहुंची। सूत्रों के मुताबिक इनमें से अधिक कर्मियों से एसआईटी व पुलिस ने पूछताछ भी की थी। कुछ की भूमिका भी संदिग्ध है। इसी वजह से ये सभी वहां से कतराते रहे और अब पूरी तरह से काम पर आना बंद कर दिया है। मंदिर से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया कि कर्मियों ने नौकरी ही छोड़ दी है। हालांकि मामले में कंपनी का कहना है कि अब तक वही छह कर्मी हटाए गए जो जेल गए हैं। बाकियों का कोई इस्तीफा आदि नहीं मिला है। चढ़ावा चोरी मामला उजागर होने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा सबसे अधिक सवालों के घेरे में थे। जब एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक हुई तो उसमें अनिल मिश्रा का नाम था। सीधे तौर पर उनको दोषी बनाया गया। मगर कहीं पर भी चंपत राय का जिक्र नहीं किया गया। इसको लेकर हर तरफ से सवाल उठ रहे हैं। उसकी वजह है कि चंपत राय ही मुख्य रूप से ट्रस्ट चला रहे थे। बाकी लोग उनके साथ काम करते थे। उनका नाम न होना सभी को चौंका दिया था।सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने जांच के दौरान पाया कि भले ही चंपत राय की भूमिका ट्रस्ट में अहम हो, लेकिन इस प्रकरण में कोई ऐसा दस्तावेज नहीं मिला, जहां पर उनकी भूमिका सामने आ रही हो। वहीं, जो दस्तावेज मिले, उनमें अनिल मिश्रा का नाम सामने आया। गोपाल राव का भी नाम लिखापढ़ी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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