2019 के फैसले को एक्टर ने दी थी चुनौती अदालत की कार्यवाही राजपाल यादव और उनकी पत्नी द्वारा दायर उन रिविजन याचिकाओं पर हुई, जिनमें उन्होंने सेशंस कोर्ट के 2019 के फैसले को चुनौती दी थी। दरअसल, सेशंस कोर्ट ने अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा चेक-बाउंस के मामलों में उन्हें दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा था। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अभिनेता को छह महीने की सजा सुनाई थी। जून 2024 में कोर्ट ने सजा पर रोक के साथ रखी थी शर्त जून 2024 में, हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी, लेकिन इसके लिए शर्त यह थी कि वे दूसरी पार्टी के साथ आपसी समझौते की संभावना तलाशने के लिए ईमानदारी से कोशिश करें। उस समय राजपाल यादव के वकील ने कहा था कि यह एक फिल्म के प्रोडक्शन के लिए फंड जुटाने का एक लेन-देन था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही, जिससे यादव को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। राजपाल यादव पर बार-बार वादा तोड़ने का आरोप हालांकि, 2 फरवरी को कोर्ट ने राजपाल यादव से 04 फरवरी को सरेंडर करने को कहा, क्योंकि उन्होंने पैसे चुकाने के लिए कोर्ट से किए गए वादों को बार-बार तोड़ा था। 16 फरवरी को कोर्ट ने उनकी सजा पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी और शिकायतकर्ता के बैंक खाते में 1.5 करोड़ रुपये जमा करने के बाद उन्हें जेल से रिहा करने की इजाजत दी। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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