इससे पहले खामेनेई का ताबूत इराक के दूसरे पवित्र शहर नजफ ले जाया गया। वहां इमाम अली की दरगाह पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। लोगों ने ताबूत को अपने कंधों पर उठाया। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि ताबूत कई बार इधर-उधर झूलने लगा। कई लोग उसे छूने की कोशिश कर रहे थे, जिससे धक्का-मुक्की भी हुई।इसके बाद ताबूत को सड़क के रास्ते नजफ से कर्बला लाया गया। जैसे ही ताबूत शहर पहुंचा। बड़ी संख्या में लोग उसके साथ चलने लगे। लोग ईरान के झंडे लहरा रहे थे और खामेनेई की तस्वीरें हाथ में लिए हुए थे। पूरे रास्ते धार्मिक नारे लगाए गए और लाउडस्पीकरों से भी लगातार घोषणाएं होती रहीं।भीषण गर्मी को देखते हुए लोगों के लिए जगह-जगह पानी का छिड़काव किया गया। खाने-पीने के स्टॉल भी लगाए गए ताकि दूर-दूर से आए लोगों को कोई परेशानी न हो। सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीमें भी मौजूद थीं।ईरान ने शनिवार से छह दिन का अंतिम संस्कार कार्यक्रम शुरू किया है। इस दौरान अंतिम यात्रा उन धार्मिक और ऐतिहासिक जगहों से होकर गुजर रही है, जो ईरान और शिया समुदाय के लिए खास महत्व रखती हैं। यात्रा तेहरान से शुरू होकर ईरान के पवित्र शहरों और फिर इराक के नजफ व कर्बला पहुंची। इसके बाद ताबूत वापस ईरान ले जाया जाएगा, जहां गुरुवार को उनके पैतृक शहर मशहद में दफनाया जाएगा। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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