सरकारी स्कूल-कॉलेजों के शिक्षक करें मेहनत राज्यपाल ने बताया कि आज मेडल पाने वालों में एकेटीयू के 16, सरकारी कॉलेज के 17 और प्राइवेट के 49 छात्रों को मेडल मिला है। उन्होंने कहा कि सरकारी कॉलेजों में गरीब छात्र पढ़ने जाते हैं। क्योंकि यहां शुल्क कम होता है। अपेक्षाकृत प्राइवेट में ज्यादा फीस देकर पढ़ते हैं। ऐसे में सरकारी स्कूल-कॉलेजों के शिक्षक मेहनत करें। छात्रों को सही से सिखाएं। क्योंकि यहां गरीब के बच्चे आते हैं। इसी तरह प्राइमरी स्कूलों में भी गरीब बच्चे जाते हैं। सरकारी स्कूल-कॉलेजों के शिक्षक पढ़ाई में ध्यान दें। उन्होंने वाइब्रेंट गुजरात का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि प्रदेश में होने वाले निवेश से जुड़ी जानकारी वाली बुकलेट स्कूल-कॉलेजों, विश्वविद्यालयों के छात्रों को उपलब्ध कराई जाए। ताकि युवाओं को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने छात्रों से तकनीकी के साथ रचनात्मकता और संस्कृति को बनाए रखने की बात कही। एनईपी के साथ तकनीकी में आगे बढ़े एकेटीयू कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए बताया कि एनईपी 2020 लागू करने के साथ ही छात्रों को इंटर डिसीप्लीनरी व माइनर डिग्री भी दी जा रही है। ड्यूल डिग्री और बीबीए इस साल से शुरू कर रहे हैं। इंडस्ट्रियल रिसर्च प्रमोशन स्कीम लागू की है। हर कोर्स में एआई एप्लीकेशन की पढ़ाई अनिवार्य की है। छात्रों को बेहतर प्लेसमेंट के अवसर मिल रहे हैं। 4668 छात्रों ने आईबीएम की इंटर्नशिप की और 4000 रुपये स्टाइपेंड भी मिला है। कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी विकसित किए गए हैं। समाज को वापस देने का समय आया प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने आपको तैयार कर यहां तक पहुंचाया है, काफी कुछ दिया है। अ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
'लव मैरिज की विरोधी नहीं': राज्यपाल बोलीं-लड़कियां पढ़ाई के दौरान गर्भवती हो जाती हैं, सरकार पर आती जिम्मेदारी
सरकारी स्कूल-कॉलेजों के शिक्षक करें मेहनत राज्यपाल ने बताया कि आज मेडल पाने वालों में एकेटीयू के 16, सरकारी कॉलेज के 17 और प्राइवेट के 49 छात्रों को मेडल मिला है। उन्होंने कहा कि सरकारी कॉलेजों में गरीब छात्र पढ़ने जाते हैं। क्योंकि यहां शुल्क कम होता है। अपेक्षाकृत प्राइवेट में ज्यादा फीस देकर पढ़ते हैं। ऐसे में सरकारी स्कूल-कॉलेजों के शिक्षक मेहनत करें। छात्रों को सही से सिखाएं। क्योंकि यहां गरीब के बच्चे आते हैं। इसी तरह प्राइमरी स्कूलों में भी गरीब बच्चे जाते हैं। सरकारी स्कूल-कॉलेजों के शिक