लगभग दो दशक से सत्ता से बाहर चल रही मध्यप्रदेश कांग्रेस आज भी अंदरूनी खींचतान से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाई है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के रूप में कांग्रेस ने नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपा है, लेकिन प्रदेश की राजनीति में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेताओं का प्रभाव अभी भी कायम है। इसी बीच उमंग सिंघार का अचानक दिग्विजय सिंह के निवास पहुंचना और दोनों नेताओं के बीच करीब दो घंटे तक बंद कमरे में चर्चा होना कई सवाल छोड़ गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल शिष्टाचार मुलाकात थी या फिर कांग्रेस के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत? ये भी बता दें कि दिग्विजय सिंह और उमंग सिंघार के रिश्ते हमेशा सहज नहीं रहे हैं। वर्ष 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद उमंग सिंघार ने दिग्विजय सिंह पर सरकार में हस्तक्षेप और पर्दे के पीछे से फैसले लेने जैसे आरोप लगाए थे। उस समय दोनों नेताओं के बीच खुलकर बयानबाजी भी हुई थी। जीतू-दिग्विजय विवाद के बाद बढ़ी हलचल यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह के बयानों को लेकर पार्टी असहज स्थिति में नजर आई थी। जीतू पटवारी ने उज्जैन में सरकारी जमीन आवंटन को लेकर भाजपा सरकार पर 500 करोड़ रुपये की जमीन एक रुपये में देने का आरोप लगाया था। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा कि संबंधित जमीन सरकारी ट्रस्ट की है और उसे निजी संस्था को नहीं दिया गया। भाजपा ने इसे कांग्रेस के अंदर की लड़ाई बताकर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया। इस मामले के बढ़ने के बाद दिग्विजय सिंह ने भोपाल में यह स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और उनके तथा जीतू पटवार …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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