13,000 करोड़ रुपये से अधिक के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले का भगोड़ा नीरव मोदी यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट में अंतिम कानूनी जंग हार गया है। इसके साथ ही उसके भारत प्रत्यर्पण में बची आखिरी कानूनी रुकावट भी दूर हो गई। सूत्रों का कहना है कि ब्रिटेन सरकार की ओर से नीरव के प्रत्यर्पण की औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं और उसे जल्द ही भारत लाया जा सकता है। ब्रिटेन की अदालतों में अपील के सभी रास्ते खत्म होने जाने के बाद नीरव ने इस साल अप्रैल में स्ट्रॉसबर्ग स्थित यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने मोदी की याचिका को गुमनाम रखने की अनुमति दी थी। इससे पूरी प्रक्रिया गोपनीय बनी रही। यह कोर्ट ऐसे मामलों के लंबित रहने के दौरान उनसे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं करता है।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नीरव को कोई राहत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रत्यर्पण को चुनौती देने के उसके सारे कानूनी रास्ते अब आधिकारिक रूप से बंद हो गए हैं। उसने यह याचिका तब दायर की गई थी जब ब्रिटेन हाईकोर्ट ने उसे प्रत्यर्पण को चुनौती देने की इजाजत देने से मना कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि जेल की स्थितियों और व्यवहार के बारे में भारत की ओर से दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं।नीरव मार्च 2019 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। राजनयिक सूत्रों ने यह भी बताया कि ब्रिटिश अधिकारियों की ओर से उसे सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण कभी भी हो सकता है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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