दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण बस हादसे के बाद भी कई परिवारों का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। जिला अस्पताल में परिजन अपनों के शवों की पहचान के लिए डीएनए रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। किसी को अपने पिता का अंतिम दर्शन करना है तो किसी को पत्नी या बेटी के शव की पहचान का इंतजार है। अस्पताल परिसर में हर वाहन के पहुंचते ही परिजनों की निगाहें उसी ओर उठ जाती हैं, मानो कोई उन्हें अपने प्रियजन की खबर देने आया हो। 12 विसरा सैंपल जयपुर लैब भेजे गए हादसे में कई शव इतनी बुरी तरह जल गए कि उनकी पहचान संभव नहीं हो सकी। कुछ शव कई हिस्सों में बंट गए थे। ऐसे में जिला प्रशासन ने पहचान के लिए 12 विसरा सैंपल डीएनए जांच हेतु जयपुर स्थित एफएसएल भेजे हैं। ‘मां, तू रो मत… पापा जरूर आएंगे’ अस्पताल में एक मार्मिक दृश्य हर किसी की आंखें नम कर रहा है। करीब चार वर्षीय मासूम अपनी मां दिव्या को सांत्वना देते हुए कहता है, “मां, तू रो मत… मैं हूं ना। पापा जरूर आएंगे।” पति दीपक को खो चुकी दिव्या कभी बेसुध हो जाती हैं तो कभी अस्पताल के गेट की ओर टकटकी लगाए बैठ जाती हैं, मानो कोई उनके पति की खबर लेकर आने वाला हो। परिवार हरिद्वार और देहरादून घूमने के बाद इंदौर लौट रहा था, तभी यह हादसा हो गया। अस्थियां विसर्जित कर लौट रहा बेटा, खुद बन गया हादसे का शिकार सीहोर निवासी देवेंद्र सिंह (45) कुछ दिन पहले दिवंगत हुए अपने पिता नरपत सिंह की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जित कर लौट रहे थे। परिवार पहले ही शोक में डूबा था, लेकिन लौटते समय बस हादसे में देवेंद्र की जिंदा जलकर मौत हो गई। अब उनके परिजन जिला अस्पताल में डीएनए रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि अ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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