ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने संयुक्त अपील की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ से शांति बहाली के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है। यह अपील दोनों देशों के बीच सामान्य द्विपक्षीय संबंधों और संवाद को फिर से शुरू करने के लिए है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखे जाने के मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पदाधिकारियों की द्विपक्षीय बातचीत के समर्थन वाली हालिया टिप्पणियों का स्वागत भी किया। मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जम्मू-कश्मीर मुद्दे को बातचीत से हल करने का अवसर भुनाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे पूरे क्षेत्र को स्थायी शांति मिलेगी। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मुफ्ती ने कहा कि दत्तात्रेय होसबाले और मोहन भागवत जैसे वरिष्ठ आरएसएस नेताओं ने पाकिस्तान से बातचीत की बात कही है। उन्होंने वाजपेयी के कथन ‘आप दोस्त बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं’ को दोहराया। मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुधार से दक्षिण एशिया और मध्य एशिया जुड़ सकते हैं। यह क्षेत्र आर्थिक गतिविधि का केंद्र बन सकता है। उन्होंने LoC और LAC पर बातचीत, सीमाएं खोलने और जम्मू-कश्मीर को शांति का पुल बनाने का सुझाव दिया।इस घटनाक्रम पर जम्मू-कश्मीर के विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि बातचीत का आह्वान करना गलत है। पत्र लिखे जाने की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद कम हो रहा है, ऐसे में बातचीत का समय उचित नहीं है। शर्मा ने जोर देकर कहा कि प …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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