पांच जजों ने कहा कि यह कार्यकारी आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी लोगों को नागरिकता मिलती है। वहीं, जज ब्रेट कैवनॉ ने कहा कि यह आदेश संघीय कानून का उल्लंघन करता है, लेकिन संविधान का नहीं। ट्रंप को अदालतों से एक के बाद एक झटके हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप को यह तीसरा बड़ा झटका लगा है। इससे पहले फरवरी में कोर्ट ने उनकी टैरिफ की नीति को रद्द कर दिया था। वहीं, सोमवार को कोर्ट ने उन्हें फेडरल रिजर्व की अधिकारी लीसा कुक को तुरंत पद से हटाने से भी रोक दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में 9 में से 6 जज ऐसे हैं, जिन्हें आमतौर पर रूढ़िवादी विचारधारा का माना जाता है। इनमें ट्रंप की ओर से नियुक्त तीन जज भी शामिल हैं। कोर्ट ने कई अन्य मामलों में ट्रंप के पक्ष में भी फैसले दिए हैं। ट्रंप के कार्यकारी आदेश का क्या मकसद था? ट्रंप के कार्यकारी आदेश का मकसद संविधान के 14वें संशोधन की नई व्याख्या करना था। इस संशोधन में कहा गया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाला और उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाला हर व्यक्ति अमेरिकी नागरिक होगा। ये भी पढ़ें: प्रस्ताव में क्या था? ट्रंप के प्रस्ताव के अनुसार, केवल उन्हीं बच्चों को जन्म के आधार पर नागरिकता मिलेगी, जिनके माता-पिता में से कम से कम एक अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी होगा। अस्थायी वीजा पर आए लोगों या अवैध रूप से अमेरिका में रहने वाले लोगों के यहां जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता नहीं मिलेगी। हालांकि, निचली अदालतों ने इस आदेश पर पहले ही रोक लगा दी थी और यह कभी लागू नहीं हो सका। गृहयुद्ध के बाद लागू हुआ था 14वां …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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