Explainer: US-ईरान डील के बाद होर्मुज से क्यों छिपकर निकल रहे जहाज, भारत की तेल-गैस आपूर्ति पर कैसे होगा असर? नौपरिवहन मामलों पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर की तरफ से हाल ही में जारी किए गए डेटा के मुताबिक, फारस की खाड़ी से भारत की तरफ आने वाले करीब 62 फीसदी जहाजों और टैंकरों ने होर्मुज पार करने के दौरान अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर लिए, ताकि उन्हें इस संवेदनशील इलाके में ट्रैक न किया जा सके। यह अपने आप में चौंकाने वाली बात इसलिए है, क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध रोकने पर जून के मध्य में ही सहमति बन गई थी और 17 जून को दोनों देशों ने इससे जुड़े एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए थे। अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुआ युद्ध फिलहाल थम गया है। दोनों ही देशों ने कुछ शर्तों के साथ संघर्ष को रोकने पर सहमति जताई है। इसी के साथ युद्ध के दौरान ईरान की तरफ से बंद किया गया होर्मुज जलडमरूमध्य भी वाणिज्यिक पोतों के परिवहन के लिए खोल दिया गया। लेकिन अब ईरान की तरफ से होर्मुज के इस्तेमाल के लिए भी कथित तौर पर नियम तय करने के बाद इस जलक्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों-टैंकरों के लिए भ्रम की स्थिति है। इस बीच सामने आया है कि भारत आने वाले कई जहाज छिपकर होर्मुज पार कर रहे हैं, ताकि किसी खतरे की स्थिति से बचा जा सके। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर होर्मुज में अभी नौपरिवहन की क्या स्थिति …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Explainer: US-ईरान डील के बाद होर्मुज से क्यों छिपकर निकल रहे जहाज, भारत की तेल-गैस आपूर्ति पर कैसे होगा असर?
Explainer: US-ईरान डील के बाद होर्मुज से क्यों छिपकर निकल रहे जहाज, भारत की तेल-गैस आपूर्ति पर कैसे होगा असर? नौपरिवहन मामलों पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर की तरफ से हाल ही में जारी किए गए डेटा के मुताबिक, फारस की खाड़ी से भारत की तरफ आने वाले करीब 62 फीसदी जहाजों और टैंकरों ने होर्मुज पार करने के दौरान अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर लिए, ताकि उन्हें इस संवेदनशील इलाके में ट्रैक न किया जा सके। यह अपने आप में चौंकाने वाली बात इसलिए है, क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध रोकने पर जून के मध्य में ही सहमति