पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। जिस लड़की से केतन शादी करने वाला था, उसी पर उसके मंगेतर की हत्या करने और साजिश रचने का आरोप है। पुलिस जांच में सामने आए कई खुलासों ने लोगों को हैरान कर दिया है। इस घटना के बाद एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर कोई इंसान अपने ही करीबी की जान लेने जैसा कदम कैसे उठा सकता है? क्या इसके पीछे केवल रिश्तों का टूटना होता है या फिर दिमाग के भीतर चल रही कोई गहरी प्रक्रिया भी जिम्मेदार होती है? इसी सवाल ने हमारा ध्यान एक बार फिर मानव मस्तिष्क के ‘ग्रे मैटर’ और हिंसक व्यवहार की ओर खींचा है। आइए, कुछ रिसर्च और रिपोर्ट के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर ये ग्रे मैटर क्या होता है। क्या होता है ग्रे मैटर और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है? हत्या के आरोपियों के दिमाग में क्या पाया गया? क्या कम ग्रे मैटर किसी को अपराधी बना देता है? क्या किशोर अपराधियों के दिमाग में भी अंतर पाया गया? साइको किलर क्या होता है? साइकोपैथी और हिंसक व्यवहार के बीच क्या संबंध है? क्या समय रहते हिंसक व्यवहार को रोका जा सकता है? क्या बचपन के अनुभव किसी इंसान को हिंसक बना सकते हैं? क्या प्यार, ईर्ष्या और असफल रिश्ते हत्या जैसी घटनाओं की वजह बन सकते हैं? क्या दिमाग का एमआरआई स्कैन देखकर अपराधी की पहचान की जा सकती है? क्या साइकोपैथ और सामान्य अपराधी में कोई अंतर होता है? क्या समय रहते हिंसक प्रवृत्ति के संकेत पहचाने जा सकते हैं? क्या है केतन हत्याकांड मामला? पुणे के व्यवसायी केतन अग्रवाल की 18 जून को लोहागढ़ किले के पास खाई में गिरने से मौत हो गई थी। शुरुआत में इसे हादसा माना गया था। केतन अपनी मंगेतर सिया …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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