राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने पर पांच जून को ही ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने आरोपियों से लगभग 58 लाख रुपये बरामद कर लिए थे। शेष रुपये आरोपियों ने बैंक खातों से निकलवाकर आठ जून तक वापस कर दिए थे। इसके बावजूद एफआईआर न दर्ज कराने से ट्रस्ट के पदाधिकारी लगातार निशाने पर हैं। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला छह जून को सार्वजनिक जरूर हुआ था लेकिन मंदिर ट्रस्ट के लोगों को चार जून को इसकी भनक लग गई थी। पांच जून को ही ट्रस्ट के पदाधिकारी और परिसर में तैनात एसआईएस के सुरक्षाकर्मियों ने आरोपियों के घर से रकम बरामद की। पहले ही दिन 58 लाख रुपये बरामद कर लिए गए। इनमें टीम अधिकांश के घर गई, जहां आरोपियों ने स्वयं लाकर रुपये रिसीव कराए।इसके साथ ही उनसे लिखित रूप से प्राप्ति ली गई, जिस पर उनके परिजनों के हस्ताक्षर भी कराए गए। शेष रकम आरोपियों ने अपने बैंक खाते में जमा करवा दिए थे, जिन्हें परिजनों के साथ निकलवाकर ट्रस्ट को सौंपा गया। आठ जून तक यह रकम 79.85 लाख रुपये बरामद कर लिए। इसके बावजूद 20 दिन तक आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई गई। इसी से ट्रस्ट की भूमिका लगातार सवालों के घेरे में है और ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर भी तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, गणना कार्य में लगे कर्मचारी लंबे समय से रकम पार कर रहे थे। ऐसे में चोरी की रकम अधिक होने की उम्मीद है। सबसे ज्यादा शक की सुई टिन्नू यादव की ओर घूम रही है, जिसके पास बड़ी मात्रा में चढ़ावा में प्राप्त हुए धातुएं भी मिलने का दावा किया जा रहा है। ट्रस्ट से जुड़े लोग सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए ऐसा करने की बात कर रहे हैं, जबकि आमजन इसमें उनकी संलिप्तता की भी आशंका जता रहे हैं।चोरी का मामला उजागर होने के …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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