रूस के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि उनकी वायु सेना ने यूक्रेन के 660 ड्रोनों को मार गिराया है। यह हमला रूस के 12 अलग-अलग इलाकों के साथ-साथ क्रीमिया प्रायद्वीप, काला सागर और आजोव सागर में किया गया। इस ड्रोन हमले के बाद दोनों देशों का टकराव बढ़ने की आशंका है।यूक्रेन पिछले कई महीनों से रूस के तेल उत्पादन और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बना रहा है। पश्चिमी अधिकारियों और जानकारों का मानना है कि इस रणनीति से रूस की ईंधन सप्लाई और सैन्य रसद में कमी आई है। इससे युद्ध के मैदान में रूस की कोशिशें धीमी पड़ गई हैं और राष्ट्रपति पुतिन पर दबाव बढ़ गया है।यह बड़ा हमला यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के उस बयान के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें उन्होंने ‘40 दिनों के प्रभाव अभियान’ का आदेश दिया था। माना जा रहा है कि इसका मकसद हमलों को तेज करके रूस को युद्ध खत्म करने के लिए मजबूर करना है। जेलेंस्की ने यह कदम तब उठाया जब पिछले एक साल से अमेरिका की शांति कोशिशों का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।नुकसान की बात करें तो मॉस्को के दक्षिण में स्थित तुला क्षेत्र में एक घर को नुकसान पहुंचा और एक महिला घायल हो गई। तुला के गवर्नर दिमित्री मिल्याएव ने बताया कि नोवोमोस्कोव्स्क शहर में एक बिजली लाइन और एक औद्योगिक केंद्र को नुकसान पहुंचा है। कुछ स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वहां एक केमिकल प्लांट और हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट में आग लग गई, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजधानी मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने बताया कि शहर की ओर बढ़ रहे 47 ड्रोनों को मार गिराया गया। वहां किसी के हताहत होने या नुकसान की खबर नहीं मिली है।दूसरी ओर, रूस ने भी यूक्रेन के ख …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Russia-Ukraine Conflict: क्रीमिया पर यूक्रेन का भीषण ड्रोन हमला, रूसी सेना ने गिराए 660 ड्रोन; बढ़ेगा टकराव?
रूस के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि उनकी वायु सेना ने यूक्रेन के 660 ड्रोनों को मार गिराया है। यह हमला रूस के 12 अलग-अलग इलाकों के साथ-साथ क्रीमिया प्रायद्वीप, काला सागर और आजोव सागर में किया गया। इस ड्रोन हमले के बाद दोनों देशों का टकराव बढ़ने की आशंका है।यूक्रेन पिछले कई महीनों से रूस के तेल उत्पादन और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बना रहा है। पश्चिमी अधिकारियों और जानकारों का मानना है कि इस रणनीति से रूस की ईंधन सप्लाई और सैन्य रसद में कमी आई है। इससे युद्ध के मैदान में रूस की कोशिश