1 of 18 Lucknow Fire - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें यह खबर एप पर पढ़ें या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो देखें संक्षिप्त देखें लोड हो रहा है अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें Link Copied पीएम हाउस पर कोई मां बच्चे की याद में रो रही थी तो कोई बहन नम आंखों से भाई की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही थी। कई लोगों के आंसू भी सूख चुके थे, लेकिन अपनों की तलाश जारी थी। कुछ लोग बार-बार पीएम हाउस के गेट की ओर देखते, फिर उम्मीद और निराशा के बीच खामोश बैठ जाते। लखनऊ के पुरनिया अग्निकांड के मृतकों के पोस्टमार्टम के दौरान केजीएमयू स्थित पीएम हाउस के बाहर दर्दनाक मंजर दिखा। रात गहराने के साथ परिजनों का दर्द और बेचैनी बढ़ती जा रही थी। इस बीच मौत की खबर आने पर मची चीख-पुकार से पोस्टमार्टम हाउस का सन्नाटा टूटा। 2 of 18 लखनऊ में कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग, विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला ज्योति के साथ कोई है? रात 9:15 बजे जालीदार लोहे के गेट के भीतर से पुलिसकर्मी की आवाज आई ज्योति के साथ कोई है? यह सुनते ही भीड़ में खड़ी मूर्ति देवी ने सिर हिलाते हुए कहा, हां, मैं हूं। इतना कहते ही वह फूट-फूटकर रोने लगी। पास में मौजूद ज्योति के पिता कमता निवासी हरिचरन भी खुद को रोक नहीं पाए। 3 of 18 लखनऊ में कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग, विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला …और भर आईं आंखें हादसे में जान गंवाने वाले निलेश के परिजनों की चीख सुनकर मौजूद लोगों की आंखें भर आई। इस बीच महिलाएं एक-दूसरे को संभालने की कोशिश कर रही थीं। साथ आए बुजुर्ग की हालत भी बिगड़ गई। वह रोते-रोते जमीन पर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Lucknow Fire: 'ज्योति के साथ कोई है?...', परिजनों का दर्द और बेचैनी; चीखों से टूटा पोस्टमार्टम हाउस का सन्नाटा
1 of 18 Lucknow Fire - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें यह खबर एप पर पढ़ें या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो देखें संक्षिप्त देखें लोड हो रहा है अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें Link Copied पीएम हाउस पर कोई मां बच्चे की याद में रो रही थी तो कोई बहन नम आंखों से भाई की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही थी। कई लोगों के आंसू भी सूख चुके थे, लेकिन अपनों की तलाश जारी थी। कुछ लोग बार-बार पीएम हाउस के गेट की ओर देखते, फिर उम्मीद और निरा