ट्रंप ने खास तौर पर शी जिनपिंग का जिक्र करते हुए कहा कि वे बीजिंग दौरे के समय उनके साथ थे। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग पूरी तरह तटस्थ रहे, जिसकी वे सराहना करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने व्लादिमीर पुतिन का भी आभार जताया। ट्रंप ने कहा कि ये दोनों नेता चाहते तो अमेरिका की राह को अधिक कठिन बना सकते थे। ट्रंप के अनुसार, शी जिनपिंग ने इस संघर्ष को सुलझाने में सहयोग किया। चीन ने ईरान को बड़े हथियार या कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइलें नहीं भेजीं। ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन चाहता तो अपने तेल के जहाजों की सुरक्षा के लिए कई युद्धपोत वहां भेज सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।इसके साथ ही, ट्रंप ने संघर्ष के दौरान ईरान में लड़कियों के एक स्कूल पर हुए हमले को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह हमला जानबूझकर नहीं किया गया था। ट्रंप के अनुसार, युद्ध के दौरान ऐसी गलतियां हो सकती हैं। यह घटना 28 फरवरी को संघर्ष के पहले दिन हुई थी। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 175 से अधिक बच्चों और शिक्षकों की मौत हुई थी।शुरुआत में ट्रंप ने बिना किसी सबूत के दावा किया था कि इस हमले के पीछे ईरान का हाथ है। हालांकि, बाद में उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी चल रही है और वे जांच के निष्कर्षों को स्वीकार करेंगे। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि किसी ने भी स्कूल को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया था।समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने पहले बताया था कि अमेरिकी सेना की शुरुआती आंतरिक जांच में इस घातक हमले के पीछे अमेरिकी बलों के होने के संकेत मिले थे। हालांकि, पेंटागन ने अभी किसी नतीजे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है औ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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