ट्रंप ने अपने बयान में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए साल 2015 के परमाणु समझौते (जेसीपीओए) पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि ओबामा की वह डील ईरान के लिए परमाणु हथियार हासिल करने का एक बेहद आसान, खूबसूरत और सुगम रास्ता थी।उनका कहना है कि अगर वह समझौता लागू रहता, तो ईरान के पास छह साल पहले ही परमाणु बम आ गया होता। ईरान अब तक उसका इस्तेमाल भी कर चुका होता। ट्रंप ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर का भुगतान किया। इसमें 1.7 अरब डॉलर यानी 16,202.32 करोड़ रुपये की नकद राशि भी शामिल थी, जो सीधे कैश के रूप में दी गई।डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका नया समझौता ओबामा की डील के बिल्कुल विपरीत है। यह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए एक अभेद्य दीवार की तरह काम करेगा। उनका दावा है कि अब ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता है। इस समझौते के बाद वे किसी भी कीमत पर, चाहे खरीद के जरिए हो, विकास के जरिए या किसी अन्य माध्यम से, परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरी डील में पिछली सरकार की तरह किसी भी तरह के धन का लेनदेन नहीं होगा।भविष्य की रणनीति साझा करते हुए ट्रंप ने कहा कि जब स्थितियां पूरी तरह शांत हो जाएंगी, तब अमेरिकी सेना अपने खूबसूरत बी-2 बॉम्बर्स और शानदार पायलटों की मदद से ईरान के मजबूत ग्रेनाइट पहाड़ों के नीचे गहराई में दबे ‘न्यूक्लियर डस्ट’ को बाहर निकालेगी।इस परमाणु सामग्री को डाउनब्लेंड करके पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया ईरान या अमेरिका, कहीं भी पूरी की जा सकती है। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि यह पूरी प्रक्रिया बेहद तेजी से, आसानी से और सुगमता से पूरी होगी। हालांकि, उन्हो …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
अमेरिका-ईरान के बीच डील कब: डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौते को लेकर क्या कहा? 106 दिनों बाद खत्म होगा गतिरोध
ट्रंप ने अपने बयान में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए साल 2015 के परमाणु समझौते (जेसीपीओए) पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि ओबामा की वह डील ईरान के लिए परमाणु हथियार हासिल करने का एक बेहद आसान, खूबसूरत और सुगम रास्ता थी।उनका कहना है कि अगर वह समझौता लागू रहता, तो ईरान के पास छह साल पहले ही परमाणु बम आ गया होता। ईरान अब तक उसका इस्तेमाल भी कर चुका होता। ट्रंप ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर का भुगतान किया। इसमें 1.7 अरब डॉलर यानी 16,202.32 करोड़