कल्याण बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि जब हमें 2024 में पांच साल के कार्यकाल का जनादेश मिला था, तो कम से कम पांच साल तक हमें सिर्फ पार्टी के काम पर ध्यान देना चाहिए था। चुनाव तो अपने समय पर होने ही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि अगर हम 2029 में और अधिक सीटें जीतकर वापस आते हैं, तो क्या भाजपा के सभी सदस्य इस्तीफा दे देंगे? कल्याण बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस तरह का बिखराव पहली बार हो रहा है। इसे राज्य के राजनीतिक इतिहास में हमेशा एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।पार्टी में मची इस टूट से आहत कल्याण बनर्जी ने अतीत का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के राजनेता चाहे कांग्रेस काल के हों, सीपीएम काल के हों या वाम मोर्चा के दौर के, वे कभी भी इस तरह से बिखरे हुए नहीं थे। राज्य में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ और सिर्फ निजी लालच की वजह से आज यह स्थिति पैदा हुई है। इन स्वार्थी लोगों ने ही मिलकर इस काले अध्याय को लिखा है। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि बंगाल की जनता बेहद समझदार है और वह अंततः इन लोगों को करारा जवाब देगी।टीएमसी के भीतर मचे आंतरिक गतिरोध और वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय के पार्टी का साथ छोड़ने पर कल्याण बनर्जी ने बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर सुदीप-दा चले गए हैं, तो चले जाएं। बहुत से लोग पार्टी छोड़कर गए हैं और सुदीप-दा भी चले गए हैं। इससे क्या फर्क पड़ता है? इससे कोई अंतर नहीं आने वाला। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग छोड़कर गए हैं, उन्हें कभी न कभी तो चुनाव का सामना करना ही पड़ेगा। जब वे जनता के बीच जाएंगे, तो आम लोग उन्हें अच्छी तरह सबक सिखाएंगे।कल्याण बनर्जी ने कें …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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