तृणमूल कांग्रेस में कथित टूट को लेकर मणिशंकर अय्यर ने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में लगभग 20 लोकसभा सांसदों ने अलग संसदीय समूह बना लिया है और भाजपा नीत एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। इसके अलावा तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया है और 80 में से 60 से अधिक विधायक भी अलग गुट में शामिल हो गए हैं। यह घटनाक्रम विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के कुछ ही सप्ताह बाद सामने आया है। अय्यर ने कहा कि घटनाएं जिस तेजी से हुई हैं, वह चौंकाने वाली हैं, लेकिन उन्हें इस स्थिति पर पूरी तरह आश्चर्य नहीं है।मणिशंकर अय्यर ने कहा कि ममता बनर्जी भारतीय राजनीति की बेहद असाधारण नेता हैं। उनके अनुसार ममता का आत्मविश्वास और संघर्ष करने की क्षमता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल में वामपंथी शासन को खत्म कर सत्ता तक पहुंचने के लिए ममता बनर्जी ने 12 से 13 वर्षों तक लगातार संघर्ष किया था। अय्यर ने कहा कि हर दिन और हर स्तर पर लड़ने की उनकी क्षमता ने उन्हें एक बड़े जननेता के रूप में स्थापित किया। यही कारण है कि आज भी वह भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिनी जाती हैं।अय्यर का मानना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर असुरक्षा की भावना बढ़ी है। उन्होंने कहा कि जो नेता आज ममता बनर्जी से दूरी बना रहे हैं, उनमें से अधिकांश का अपना मजबूत राजनीतिक आधार नहीं था। उनकी पहचान और राजनीतिक ताकत काफी हद तक ममता बनर्जी के नेतृत्व से जुड़ी हुई थी। अय्यर के अनुसार अब ये नेता अपने लिए नए राजनीतिक अवसर तलाश रहे हैं और इसी कारण बड़ी संख्या में पार्टी छोड़ने की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में ऐसे बदलाव ह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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