आज का शब्द: जाज्वल्यमान और अज्ञेय की कविता- अन्धकार में जागने वाले ‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- जाज्वल्यमान, जिसका अर्थ है- प्रज्वलित, दीप्तिमान, तेजस्वी। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- अन्धकार में जागने वाले रात के घुप अन्धेरे में जो एकाएक जागता है और दूर सागर की घुरघुराहट-जैसी चुप सुनता है वह निपट अकेला होता है। अन्धकार में जागनेवाले सभी अकेले होते हैं। पर जो यों ही सहमी हुई रात में थके सहमे सियार की हकलाती हुआँ-हुआँ-सी हवाई हमले के भोंपू की आवाज़ से एकाएक जगा दिया जाता है वह और भी अकेला होता है: और जब वह घर से बाहर निकल कर सागर की घुरघुराहट-जैसे चुप घनी रात के घुप अन्धेरे में घिर जाता है तब वह अकेले के साथ मामूली भी हो जाता है। घुप रात के चुप सन्नाटे में अकेलापन और मामूलियत: इसे अचानक जगाया गया हर आदमी अपनी नियति पहचानता है। वही हम हैं: घुप अन्धेरे में सरसराहटें सुनते हुए अकेले और मामूली। न होते अकेले तो डरते। न होते मामूली तो घबराते। पर अकेले होने और साथ ही मामूली होने में एकाएक अन्धेरा हमारी मुट्ठी में आ जाता है और वह अनपहचानी सुरसुराहट एक सन्देश बन जाती है जिसे हर मामूली अकेला अकेलेपन और मामूलियत की सैकड़ों सदियों से जानता है: कि वह एक बच जाता है; वही अनश्वर है। मामूली और अकेला: उस घुप अंधेरे में मेर भीतर से सैकड़ों घुसपैठिए आग लगाते हुए गुज़र जाते हैं— पर उसी में मैं उन सब की ज़िन्दगी जीता हूँ जिन्होंने दुश्मन के टैंक तोड़े जिन्होंने बममार विमान गिराए जिन्होंने राहों में बिछाई गईं विस्फोटक सुरंगे समेटीं, जो गिरे और प्रतीक्षा में रह कर भी उठाए नहीं गए, पथरा गए, जो खेत रहे, जिन्होंने वीर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
आज का शब्द: जाज्वल्यमान और अज्ञेय की कविता- अन्धकार में जागने वाले
आज का शब्द: जाज्वल्यमान और अज्ञेय की कविता- अन्धकार में जागने वाले 'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- जाज्वल्यमान, जिसका अर्थ है- प्रज्वलित, दीप्तिमान, तेजस्वी। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- अन्धकार में जागने वाले रात के घुप अन्धेरे में जो एकाएक जागता है और दूर सागर की घुरघुराहट-जैसी चुप सुनता है वह निपट अकेला होता है। अन्धकार में जागनेवाले सभी अकेले होते हैं। पर जो यों ही सहमी हुई रात में थके सहमे सियार की हकलाती हुआँ-हुआँ-सी हवाई हमले के भोंपू की आवाज़ से एकाएक जगा दिया जाता है वह और