तमिलनाडु में इसी साल मई के महीने में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला था। अभिनेता से नेता बने सी. जोसफ विजय ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। पिछले 60 साल में यह पहली बार हुआ है जब तमिलनाडु में द्रमुक (डीएमके) या अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) से इतर किसी तीसरे दल की सरकार बनी है। इस बड़े बदलाव के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसे एक नए युग की शुरुआत मान रहे थे। लेकिन विपक्षी दलों का सोचना इससे बिल्कुल अलग है।चेन्नई में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोला। दरअसल, यह कार्यक्रम विदुथलाई चिरुथाईगल काची के पूर्व विधायक पनैयूर बाबू और उनके समर्थकों को द्रमुक में शामिल कराने के लिए आयोजित किया गया था।नेताओं का पार्टी में स्वागत करते हुए स्टालिन ने कहा कि जब यह सरकार सत्ता में आई थी, तब मैंने कहा था कि मैं छह महीने तक इसकी आलोचना नहीं करूंगा। लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। अब ऐसा डर सताने लगा है कि मुझे अपने तय समय से पहले ही बोलना पड़ेगा। स्टालिन ने सरकार की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जनता के बीच इस सरकार को लेकर भारी असंतोष है। आलोचनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब सवाल छह, पांच या चार महीनों का नहीं रह गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सरकार तीन महीने भी टिक पाएगी।अपने इस तीखे राजनीतिक हमले के बीच एमके स्टालिन ने अपनी पार्टी के नए कार्यकर्ताओं को अनुशासन की सीख भी दी। उन्होंने दल-बदल कर आए नेताओं से साफ कहा कि वे अपनी पुरानी पार्टी की बुराई न करें। उन्होंने द्रमुक के संस्थापक सीएन अन्नादुरई के एक प्रसिद्ध कथन का जिक् …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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