आज का शब्द: अगणित और हरिवंशराय बच्चन की कविता- क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं ‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अगणित, जिसका अर्थ है- जिसकी गिनती न हो सके, बहुत अधिक, असंख्य। प्रस्तुत है क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं। क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं! अगणित उन्मादों के क्षण हैं, अगणित अवसादों के क्षण हैं, रजनी की सूनी घड़ियों को किन-किन से आबाद करूँ मैं! क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं! याद सुखों की आँसू लाती, दुख की, दिल भारी कर जाती, दोष किसे दूँ जब अपने से अपने दिन बर्बाद करूँ मैं! क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं! दोनों करके पछताता हूँ, सोच नहीं, पर, मैं पाता हूँ, सुधियों के बंधन से कैसे अपने को आज़ाद करूँ मैं! क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं! हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। 6 घंटे पहले …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
आज का शब्द: अगणित और हरिवंशराय बच्चन की कविता- क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं
आज का शब्द: अगणित और हरिवंशराय बच्चन की कविता- क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं 'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अगणित, जिसका अर्थ है- जिसकी गिनती न हो सके, बहुत अधिक, असंख्य। प्रस्तुत है क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं। क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं! अगणित उन्मादों के क्षण हैं, अगणित अवसादों के क्षण हैं, रजनी की सूनी घड़ियों को किन-किन से आबाद करूँ मैं! क्या भूलूँ, क्या याद करूँ मैं! याद सुखों की आँसू लाती, दुख की, दिल भारी कर जाती, दोष किसे दूँ जब अपने से अपने दिन बर्बाद करूँ मैं! क्या