हाल ही में इस्लामाबाद में पाकिस्तान और यूरोपीय संघ (ईयू) की एक बड़ी बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद दोनों ने एक साझा बयान जारी किया। इस बयान में यूरोपीय संघ ने भारत के जम्मू-कश्मीर की तुलना सीधे यूक्रेन से कर दी। इस हरकत से यूरोप का असली चेहरा सामने आ गया है। रेस्टेली ने कहा कि ऐसा करके यूरोप ने पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह छिपा दिया। सिर्फ दिखावे के लिए यूरोप ने आतंकवाद के खिलाफ अपने ही सिद्धांतों की धज्जियां उड़ा दीं। इससे भारत में एक गलत संदेश गया है। साफ लगता है कि यूरोप को भारत का बड़ा बाजार तो चाहिए, लेकिन वह भारत की सुरक्षा की चिंता बिल्कुल नहीं करता।यूरोपीय संघ की बड़ी नेत्री काजा कलास ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा किया। इस दौरे को लेकर विशेषज्ञ रेस्टेली ने इसे यूरोप का रणनीतिक भ्रम कहा है। कलास ने इस साल की शुरुआत में भारत के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने का दावा किया था। लेकिन पाकिस्तान जाते ही उनका रुख बदल गया। असल में यूरोप अमेरिका से होने वाले अपने नुकसान की भरपाई करना चाहता है। इसके लिए वह भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करना चाहता है। लेकिन जैसे ही उपमहाद्वीप में तनाव बढ़ता है, वह फिर से पुराने पाकिस्तान राग पर लौट आता है। यूरोप सिर्फ ईरान के मामले में अपनी जगह बनाने के लिए आसिफ मुनीर जैसे तानाशाहों के आगे झुक रहा है।सर्जियो रेस्टेली ने साफ शब्दों में कहा कि किसी नेता के पाकिस्तान जाने से कोई दिक्कत नहीं है। असल दिक्कत यह है कि इस दौरे में पाकिस्तान से आतंकवाद पर कोई जवाब नहीं मांगा गया। यूरोप के इस ढीले रवैये से पाकिस्तान को बिना कोई कीमत चुकाए अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। यूरोप को चाहिए था कि …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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