भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एआई को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि एआई अब केवल एक कल्पनात्मक तकनीक नहीं, बल्कि एक वास्तविकता बन चुकी है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस दशक में लिए जाने वाले निर्णय तकनीक, शक्ति, स्वतंत्रता और न्याय के बीच भविष्य के संबंधों को निर्धारित करेंगे। कानून की जिम्मेदारी बताई ब्रिटेन के बर्कबेक, लंदन विश्वविद्यालय में “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इंटरनेशनल लॉ” विषय पर आयोजित सार्वजनिक व्याख्यान में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि तकनीक न तो स्वभाव से अच्छी होती है और न ही बुरी। इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि समाज उसे किस कानूनी, राजनीतिक और नैतिक ढांचे के भीतर उपयोग करता है। कानून की जिम्मेदारी तकनीकी प्रगति का विरोध करना या उसके सामने बिना सवाल झुक जाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी शक्ति संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक वैधता और मानवीय गरिमा के प्रति जवाबदेह बनी रहे। एआई कैसे सभी क्षेत्रों को कर रहा प्रभावित? उन्होंने कहा कि एआई शासन, व्यापार, युद्ध, संचार, सार्वजनिक प्रशासन और यहां तक कि न्यायिक एवं संप्रभु शक्तियों के इस्तेमाल को भी तेजी से प्रभावित कर रहा है। सरकारें अब कल्याणकारी योजनाओं के आवंटन, आव्रजन आवेदनों के मूल्यांकन, सीमा निगरानी, वित्तीय नियमन और पुलिसिंग जैसे कार्यों में एल्गोरिदमिक प्रणालियों का उपयोग कर रही हैं। वहीं सेनाएं स्वायत्त सैन्य क्षमताओं का विकास कर रही हैं और अदालतें एआई से जुड़े साक्ष्यों, स्वचालित निर्णयों तथा डिजिटल न्यायिक प्रक्रिया जैसे सवालों से जूझ रही हैं। एआई न्यायिक व्यव …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
CJI: 'मानवता और न्याय के सामने AI सबसे बड़ी कानूनी चुनौती', सीजेआई बोले- इस दशक के फैसले तय करेंगे भविष्य
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एआई को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि एआई अब केवल एक कल्पनात्मक तकनीक नहीं, बल्कि एक वास्तविकता बन चुकी है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस दशक में लिए जाने वाले निर्णय तकनीक, शक्ति, स्वतंत्रता और न्याय के बीच भविष्य के संबंधों को निर्धारित करेंगे। कानून की जिम्मेदारी बताई ब्रिटेन के बर्कबेक, लंदन विश्वविद्यालय में "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इंटरनेशनल लॉ" विषय पर आयोजित सार्वजनिक व्याख्यान