रिमांड के दौरान कई दौर की पूछताछ सीबीआई सूत्रों के अनुसार रिमांड अवधि के दौरान गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह से कई चरणों में विस्तृत पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने उनसे घटना के विभिन्न पहलुओं को लेकर सवाल किए और उनके बयानों को रिकॉर्ड किया। हालांकि दोनों आरोपियों ने अपने ऊपर लगाए गए मारपीट, प्रताड़ना और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोपों से इनकार किया है। उनका दावा है कि त्विषा शर्मा के साथ उनके संबंध सामान्य थे और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। सीबीआई अब आरोपियों के बयानों का उपलब्ध तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के साथ मिलान कर रही है, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। घटनाक्रम का कराया गया रीक्रिएशन जांच के दौरान सोमवार को पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन भी कराया गया। जांच एजेंसी का उद्देश्य घटना के समय मौजूद परिस्थितियों को समझना और आरोपियों द्वारा किए जा रहे दावों की सत्यता का परीक्षण करना था। इसके साथ ही घटनास्थल से जब्त किए गए साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच भी जारी है। जांच एजेंसियां रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं, जिससे मामले की कई अहम कड़ियां जुड़ सकती हैं। साक्ष्य संरक्षण में कथित लापरवाही ने खड़े किए सवाल मामले की जांच के दौरान एक गंभीर प्रक्रियागत चूक भी सामने आई है। जांच में पता चला है कि जिस लिगेचर बेल्ट के सहारे त्विषा शर्मा फंदे पर लटकी मिली थीं, उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तत्काल सुरक्षित नहीं किया गया था। आरोप है कि घटनास्थल से बरामद यह महत्वपूर्ण साक्ष्य जांच अधिकारी द्वारा तत्काल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजने के बजाय करीब दो दिन तक अपनी निजी कार में रखा गया। इतना ही …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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