पिछले कुछ समय से रूस में डीजल और जेट ईंधन के निर्यात पर रोक लगाने की चर्चा चल रही थी। अब सरकार ने इस पर मुहर लगा दी है। दरअसल, रूस के ऊर्जा केंद्रों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं। इन हमलों की वजह से तेल रिफाइनरियों में कामकाज बहुत कम हो गया है। उत्पादन का यह स्तर पिछले कई साल में सबसे निचला स्तर है।बीते कुछ महीनों में रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। तेल साफ करने वाली रिफाइनरियों और पाइपलाइन नेटवर्क को लगातार निशाना बनाया गया है। इन हवाई हमलों के कारण रूस की तेल साफ करने की क्षमता घट गई है। आने वाले दिनों में देश के भीतर ईंधन की मौसमी मांग बढ़ने वाली है। इसे देखते हुए सरकार की पहली प्राथमिकता घरेलू बाजार को सुरक्षित करना है।रूस दुनिया में रिफाइंड पेट्रोलियम का एक बहुत बड़ा निर्यातक देश है। वह हर साल भारी मात्रा में डीजल और जेट ईंधन दूसरे देशों को बेचता है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि इस नए प्रतिबंध का असर पुराने समझौतों पर नहीं पड़ेगा। दो देशों की सरकारों के बीच जो संधियां पहले से तय हैं, उनके तहत ईंधन की सप्लाई जारी रहेगी। इससे पहले रूस अपने ऑटोमोबाइल ईंधन के निर्यात पर भी ऐसी ही पाबंदियां लगा चुका है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
रूस का बड़ा फैसला: विमानन ईंधन के निर्यात पर लगाई रोक, 30 नवंबर तक लागू रहेगा प्रतिबंध
पिछले कुछ समय से रूस में डीजल और जेट ईंधन के निर्यात पर रोक लगाने की चर्चा चल रही थी। अब सरकार ने इस पर मुहर लगा दी है। दरअसल, रूस के ऊर्जा केंद्रों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं। इन हमलों की वजह से तेल रिफाइनरियों में कामकाज बहुत कम हो गया है। उत्पादन का यह स्तर पिछले कई साल में सबसे निचला स्तर है।बीते कुछ महीनों में रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। तेल साफ करने वाली रिफाइनरियों और पाइपलाइन नेटवर्क को लगातार निशाना बनाया गया है। इन हवाई हमलों के कारण रूस की तेल साफ