- विदेशी निवेशकों के बाजार से पैसा निकालने की सबसे मुख्य वजह क्या है? जवाब: बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर हमला करने के बाद दुनिया के तेल कारोबार के लिए अहम होर्मुज जलडमरुमध्य बाधित हो गया। इसके असर से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का भाव आसमान छूने लगा। विदेशी कच्चे तेल पर निर्भर भारत पर भी इस संकट का असर पड़ा। इससे डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो गया और विदेशी निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी। इसके अलावे टैक्स हैवन देशों जैसे मॉरीशस, सिंगापुर, लक्जमबर्ग और आयरलैंड जैसे देशों के जरिए भारतीय बाजार में हिस्सा लेने वाले अनरेगुलेट फंड्स ने भी वैश्विक भू- राजनीति के बाधित होने के बाद भारतीय बाजार से पैसे निकालने शुरू कर दिए। सितंबर 2024 से अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों की बात करें तो भारतीय बाजार में अमेरिकी निवेशकों अपने निवेश में करीब 10% की बिकवाली की है। इसके अलावे सिंगापुर के निवेशकों ने 29%, मॉरिशस के निवेशकों ने 26% और लक्जमबर्ग के निवेशकों ने भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी करीब 16% तक घटा दी है। हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि इसी दौरान जापान और फ्रांस ने भारत में मामूली निवेश बढ़ाया है। 6. पश्चिम एशिया के तनाव से भारत के शेयर बाजार पर क्या असर पड़ता है? जवाब: पश्चिम एशिया के तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा और तेल जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है, इसलिए महंगे तेल से भारत का आयात बिल बढ़ने और महंगाई में इजाफा होने की चिंता निवेशकों को सता रही है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Explainer: बाजार से विदेशी निवेशकों का मोहभंग? निकाले हजारों करोड़ रुपये, 10 सवालों के जवाब से समझें सबकुछ
5. विदेशी निवेशकों के बाजार से पैसा निकालने की सबसे मुख्य वजह क्या है? जवाब: बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर हमला करने के बाद दुनिया के तेल कारोबार के लिए अहम होर्मुज जलडमरुमध्य बाधित हो गया। इसके असर से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का भाव आसमान छूने लगा। विदेशी कच्चे तेल पर निर्भर भारत पर भी इस संकट का असर पड़ा। इससे डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो गया और विदेशी निवेशकों ने बिक