सपा इस बार कांग्रेस को 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले कम से कम 25 सीटें कम देगी। लोकसभा चुनाव की सफलता के बाद अखिलेश यादव खुद को यूपी में बड़े भाई की भूमिका में देख रहे हैं और सीटों के मामले में कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं। वहीं, कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते अपनी जमीन ज्यादा सिकुड़ने नहीं देना चाहती।ऐसे में 2027 की बिसात पर दोनों सहयोगियों के बीच एक कड़ा और दिलचस्प मोल-तोल होना तय माना जा रहा है। हालांकि गठबंधन के भविष्य को लेकर अखिलेश ने साफ कर दिया है कि बात सीटों की संख्या की नहीं, बल्कि जीत की है। वह स्पष्ट कर चुके हैं कि सपा की नजर भाजपा को हराने वाले जिताऊ समीकरणों पर है।दूसरी ओर, कांग्रेस पिछली बार की तुलना में कम सीटों पर नहीं लड़ना चाहती। साथ ही इस बार मजबूत प्रत्याशियों को तलाशने में देरी भी नहीं करना चाहती। यही वजह है कि पार्टी आलाकमान ने स्थानीय संगठन को 100 से 125 सीटों पर कद्दावर चेहरों की सूची तैयार करने को कहा है। दबाव की रणनीति के तहत कांग्रेस प्लान बी पर भी काम कर रही है। इसे तहत सभी 403 सीटों पर संगठन को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।इस बीच, गठबंधन के अंदर एक नया बसपा फैक्टर भी सुलग रहा है। कांग्रेस का एक धड़ा अंदरखाने बसपा के साथ तालमेल का इच्छुक है। हाल ही में कांग्रेस के दो बड़े नेताओं की बसपा प्रमुख मायावती से मिलने की कोशिशों ने सपा को खासा नाराज कर दिया। कांग्रेस ने जल्द ही इस चूक को भांपते हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की और साफ किया कि उनका गठबंधन केवल सपा के साथ ही रहेगा। दिलचस्प बात यह है कि इतनी कोशिशों के बावजूद बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस के प्रति कोई नरम रुख नहीं …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
UP: सीट नहीं जीत पर अड़ी सपा, कांग्रेस की बढ़ी महत्वाकांक्षा; क्या 2027 चुनाव में सीट बंटवारे पर फंसेगा पेच?
सपा इस बार कांग्रेस को 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले कम से कम 25 सीटें कम देगी। लोकसभा चुनाव की सफलता के बाद अखिलेश यादव खुद को यूपी में बड़े भाई की भूमिका में देख रहे हैं और सीटों के मामले में कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं। वहीं, कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते अपनी जमीन ज्यादा सिकुड़ने नहीं देना चाहती।ऐसे में 2027 की बिसात पर दोनों सहयोगियों के बीच एक कड़ा और दिलचस्प मोल-तोल होना तय माना जा रहा है। हालांकि गठबंधन के भविष्य को लेकर अखिलेश ने साफ कर दिया है कि बात सीटों की संख्य