विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल लगभग दस में से नौ प्रमुख अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले वर्ष में वैश्विक आर्थिक वृद्धि धीमी होगी। वहीं, केवल 13 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने वैश्विक मंदी की आशंका जताई है।रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 94 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों को होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान आने से वैश्विक मुद्रास्फीति में वृद्धि की उम्मीद है। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से एक बड़े वैश्विक आर्थिक झटके की चिंताएं बढ़ गई हैं। प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने को पिछले साल के टैरिफ विवादों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर आर्थिक बाधा माना है।रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह बंद साल के आखिर तक जारी रहता है, तो इसका असर कोविड-19 संकट की गंभीरता के जैसा हो सकता है। इसकी वजह से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा और खाद्य लागतों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। डब्ल्यूईएफ की प्रबंध निदेशक सादिया जाहिदी ने कहा, पश्चिम एशिया संघर्ष के आर्थिक प्रभाव अगले कई महीनों तक महसूस किए जाएंगे।डब्ल्यूईएफ ने कहा, ‘‘2026 में भारत ने व्यापार नीतियों को अधिक खुला बनाने, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।’’ रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.5 फीसदी रह सकती है, हालांकि पश्चिम एशिया संकट के कारण जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। उभरते हुए बड़े बाजारों में भारत आकार, वृद्धि और संभावनाओं का सबसे संतुलित मिश्रण पेश क …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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