सवाल: पश्चिम एशिया संकट और महंगाई को लेकर क्या चुनौतियां हैं? जवाब: अर्थव्यवस्था मजबूत जरूर है, लेकिन वैश्विक जोखिमों से पूरी तरह अछूती नहीं है। आरबीआई ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष 2026 में वैश्विक विकास के लिए सबसे बड़ी रुकावट के रूप में फिर से उभरा है। इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, सप्लाई चेन में रुकावट और वैश्विक अनिश्चितता जैसी चुनौतियां महंगाई को बढ़ा सकती हैं। आरबीआई ने अनुमान लगाया है कि 2026-27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर 4.6 प्रतिशत तक रह सकती है, यह 2025-26 में मात्र 2.1 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन वैश्विक तनावों के कारण कमोडिटी की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे इनपुट कॉस्ट (लागत) और मजदूरी पर असर पड़ सकता है, साथ ही विनिमय दर में भी उतार-चढ़ाव आ सकता है। सवाल: महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों और राजकोषीय घाटे पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं? जवाब: महंगाई के लगातार बदलते जोखिमों के बीच आरबीआई मौद्रिक नीति को लेकर बेहद सतर्क है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान महंगाई में भारी कमी आने पर मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) ने रेपो रेट में 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी। लेकिन, अप्रैल 2026 में भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए एमपीसी ने रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा और अपना ‘न्यूट्रल’ रुख बनाए रखा है। राजकोषीय मोर्चे पर, सरकार मजबूती से काम कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल राजकोषीय घाटा (जीएफडी) जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहा, जो 4.5 प्रतिशत के लक्ष्य से कम है। वहीं, सरकार ने 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रखा है …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
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सवाल: पश्चिम एशिया संकट और महंगाई को लेकर क्या चुनौतियां हैं? जवाब: अर्थव्यवस्था मजबूत जरूर है, लेकिन वैश्विक जोखिमों से पूरी तरह अछूती नहीं है। आरबीआई ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष 2026 में वैश्विक विकास के लिए सबसे बड़ी रुकावट के रूप में फिर से उभरा है। इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, सप्लाई चेन में रुकावट और वैश्विक अनिश्चितता जैसी चुनौतियां महंगाई को बढ़ा सकती हैं। आरबीआई ने अनुमान लगाया है कि 2026-27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित म