सवाल: इस बीच वित्तीय और कानूनी विवादों ने क्या भूमिका निभाई? जवाब: जब कंपनी का खर्च उसकी कमाई से कहीं ज्यादा हो गया, तो आंतरिक हालात बिगड़ने लगे। वित्तीय नतीजे समय पर जमा नहीं किए गए और इसी बीच कंपनी के ऑडिटर डेलॉयट और कई बोर्ड सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। सबसे बड़ा संकट तब खड़ा हुआ जब कंपनी ने 1.2 अरब डॉलर का विदेशी लोन लिया। विदेशी कर्जदाताओं ने आरोप लगाया कि बायजू ने करीब 53.3 करोड़ डॉलर की रकम को जटिल तरीकों से विदेशी खातों में ट्रांसफर कर दिया है। इसके बाद अमेरिका से लेकर भारत तक मुकदमों की झड़ी लग गई। सवाल: बायजू ने दूसरी कंपनियों को खरीदने की जो होड़ लगाई थी, क्या उससे कंपनी को कोई फायदा हुआ? जवाब: शुरुआत में यह रणनीति बहुत शानदार और आक्रामक लगी, लेकिन असल में इसने कंपनी के कामकाज को बुरी तरह उलझा दिया। महामारी के दौरान मिले अपार पैसे के दम पर बायजू ने ‘आकाश एजुकेशनल सर्विसेज’, ‘व्हाइटहैट जूनियर’ और ‘ग्रेट लर्निंग’ जैसी कई कंपनियों को ताबड़तोड़ तरीके से खरीदा। कंपनी का सपना हर उम्र के लिए एक ग्लोबल एजुकेशन सिस्टम बनाने का था, लेकिन अलग-अलग देशों और श्रेणियों के इन व्यवसायों को एक साथ जोड़ना और चलाना बेहद मुश्किल साबित हुआ। कंपनी के पास इतने बड़े कारोबार को एक साथ संभालने के लिए जरूरी अनुशासन की कमी थी। नतीजा यह हुआ कि लागत बेतहाशा बढ़ती गई, अंदरूनी जटिलताएं बढ़ गईं और फैसले लेने की प्रक्रिया बेहद धीमी और अव्यवस्थित हो गई। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Byju's: अर्श से फर्श पर कैसे आई 'रविंद्रन की बायजू'? मूल्यांकन 22 अरब डॉलर से गिरकर शून्य हुआ, समझें सबकुछ
सवाल: इस बीच वित्तीय और कानूनी विवादों ने क्या भूमिका निभाई? जवाब: जब कंपनी का खर्च उसकी कमाई से कहीं ज्यादा हो गया, तो आंतरिक हालात बिगड़ने लगे। वित्तीय नतीजे समय पर जमा नहीं किए गए और इसी बीच कंपनी के ऑडिटर डेलॉयट और कई बोर्ड सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। सबसे बड़ा संकट तब खड़ा हुआ जब कंपनी ने 1.2 अरब डॉलर का विदेशी लोन लिया। विदेशी कर्जदाताओं ने आरोप लगाया कि बायजू ने करीब 53.3 करोड़ डॉलर की रकम को जटिल तरीकों से विदेशी खातों में ट्रांसफर कर दिया है। इसके बाद अमेरिका से लेकर भारत तक मुकदमों की