क्वाड देशों ने ऊर्जा बाजार को स्थिर और पारदर्शी बनाने की बात कही है। इसके लिए आपूर्ति शृंखला को मजबूत और विविध बनाया जाएगा। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए। यह वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।इस योजना में विकासशील और छोटे द्वीपीय देशों का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रशांत क्षेत्र के छोटे देशों की ऊर्जा जरूरतें पूरी की जाएंगी। चारों देशों ने क्षेत्रीय पहलों की सराहना की है।एशिया की ऊर्जा स्थिरता के लिए ‘पावर एशिया’ कार्यक्रम।दक्षिण एशिया के पड़ोसी देशों को ऊर्जा सुरक्षा में समर्थन।दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए दो अरब डॉलर का निवेश कोष। इसके साथ ही आसियान पावर ग्रिड को समर्थन और फिजी को तीन करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की वित्तीय सहायता।भविष्य की चुनौतियों के लिए एक नई कार्य योजना तैयार की जाएगी। इसके तहत तकनीक, प्रबंधन, नीति और बाजार विश्लेषण पर मिलकर काम होगा। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए संयुक्त अभ्यास भी किए जाएंगे। इसका एक मुख्य उद्देश्य सामरिक तेल भंडारों को मजबूत करना है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के लिए सहयोग जारी रहेगा। इस पूरे तालमेल को बेहतर बनाने के लिए जल्द ही ‘क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम’ बनाया जाएगा। यह फोरम उच्च स्तरीय चर्चा और सहयोग को आगे बढ़ाएगा।क्वाड देशों का यह साझा बयान होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा संकल्प है। सामरिक तेल भंडारों को मजबूत करने और ‘फ्यूल सिक्योरिटी फोरम’ के गठन से वैश्विक बाजार की अस्थिरता को रोकने और …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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