इस दौरान मार्को रूबियो और एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया संघर्ष, अमेरिकी वीजा नियमों में बदलाव, भारतीयों पर नस्लभेदी टिप्पणियों, होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने और भारत के साथ रणनीतिक संबंधों पर खुलकर अपनी बात रखी। आइए जानते हैं संयुक्त प्रेस वार्ता की बड़ी बातें…अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने जे1, एफ1 और एच1बी वीजा नियमों में हालिया बदलावों पर भारत के योगदान की खुलकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है और अमेरिका इस निवेश को और बढ़ने की उम्मीद करता है।रूबियो ने साफ किया, ‘‘अमेरिका में आव्रजन प्रणाली में हो रहे बदलाव या आधुनिकीकरण किसी एक देश, विशेषकर भारत पर केंद्रित नहीं हैं। यह एक वैश्विक प्रक्रिया है जिसे दुनिया भर में लागू किया जा रहा है। अमेरिका इस समय अपनी आव्रजन प्रणाली के आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रहा है।‘‘उन्होंने दोहराया कि यह प्रणाली भारत को लक्षित नहीं कर रही है, बल्कि इसे विश्व स्तर पर लागू किया जा रहा है। यह एक संक्रमण काल है और इसमें कुछ मुश्किलें आ सकती हैं। हालांकि, उनका मानना है कि अमेरिका एक बेहतर, अधिक कुशल और टिकाऊ आव्रजन प्रणाली की ओर बढ़ेगा, जो पिछली प्रणालियों से कहीं अधिक प्रभावी होगी।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा, “ईरान के मामले में मुझे लगता है कि आज कुछ घंटों में और अच्छी खबरें आएंगी। इस मामले में आगे के एलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। इतना कहना काफी है कि कुछ महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हालांकि, यह अंतिम प्रगति नहीं है। अमेरिका का अंतिम लक्ष्य यह है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना सके।‘‘उन्होंने क …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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