अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में कुछ अच्छे संकेत जरूर दिख रहे हैं, लेकिन अगर बात नहीं बनी तो अमेरिका के पास ‘दूसरे विकल्प’ (सैन्य कार्रवाई) भी पूरी तरह से खुले हैं। इसके साथ ही, भारत के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर निकलने से ठीक पहले रुबियो ने भारत को एक ‘महान साझेदार’ बताया और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सहयोग की बात कही। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल (टैक्स) लगाने की योजना बनाई है, जिस पर अमेरिका ने कड़ी आपत्ति जताई है। रुबियो ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान की यह टोल योजना किसी भी शांति समझौते को ‘असंभव’ बना देगी। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई भी देश इस तरह के टोल सिस्टम के पक्ष में नहीं है और यह बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता है। अगर ईरान इस अहम जलमार्ग पर अपनी पकड़ का फायदा उठाकर पैसा कमाने की कोशिश करता है, तो कूटनीतिक समझौते की उम्मीदें टूट जाएंगी।ईरान के अलावा, क्यूबा के मुद्दे पर भी अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है। रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन क्यूबा सरकार के साथ अपने मतभेदों को कूटनीतिक तरीके से सुलझाना चाहता है, लेकिन वे इसे लेकर ज्यादा आशान्वित नहीं हैं। उन्होंने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर आतंकवाद के आरोपों के बाद सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि यद्यपि अमेरिका की प्राथमिकता हमेशा एक शांतिपूर्ण समझौता होती है, लेकिन क्यूबा के मौजूदा नेतृत्व को देखते हुए इसकी संभावना बहुत कम नजर आती है।अपने भारत दौरे (23-26 मई) के बारे में बात करते हुए रुबियो ने भारत की जमकर तारीफ की। उन्होंने भारत को एक ‘महान सह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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