निर्वाचन आयोग ने 29 अप्रैल को दूसरे चरण में हुए मतदान के दौरान गंभीर चुनावी अपराध और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोपों के बाद पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया था। उस दौरान कई बूथों से EVM के साथ कथित छेड़छाड़ की शिकायतें सामने आई थीं। आरोप था कि मशीनों पर इत्र जैसे पदार्थ और चिपकने वाली टेप लगाई गई थी।इस मामले की जांच के लिए चुनाव आयोग के पूर्व विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने क्षेत्र का दौरा किया था। जांच में कम से कम 60 बूथों पर कथित छेड़छाड़ के सबूत मिले। इसके अलावा कई मतदान केंद्रों पर लगे वेब कैमरों की फुटेज से छेड़छाड़ की कोशिशों का भी पता चला। इसके बाद बूथ लेवल अधिकारियों, प्रिसाइडिंग अधिकारियों और चुनाव कर्मियों की भूमिका पर सवाल उठे। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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