पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को 27 किलोमीटर जमीन सौंप दी है। गुरुवार को राज्य सचिवालय नबान्ना में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बीएसएफ अधिकारियों की मौजूदगी में औपचारिक रूप से भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया की शुरुआत की। सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? राज्य के मुर्शिदाबाद और मालदा जिले इस समय सुरक्षा और राजनीतिक दोनों वजहों से बेहद अहम माने जा रहे हैं। इन्हीं संवेदनशील इलाकों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सीमा पर फेंसिंग और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर लगाया आरोप दरअसल, मुर्शिदाबाद और मालदा दोनों जिले सीधे बांगलादेश सीमा से जुड़े हैं और यहां बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है। 2011 की जनगणना के मुताबिक मुर्शिदाबाद में मुस्लिम आबादी करीब 66 प्रतिशत और मालदा में 51 प्रतिशत है। भाजपा लंबे समय से इन इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाती रही है। पार्टी का आरोप है कि अवैध घुसपैठियों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए स्थानीय स्तर पर पहचान दिलाई जाती रही है।हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के शुरुआती फाइनल आंकड़ों में भी मुर्शिदाबाद और मालदा चर्चा में रहे। करीब 60 लाख से ज्यादा लंबित मतदाताओं में लगभग एक-तिहाई सिर्फ इन दो सीमावर्ती जिलों से हैं। मुर्शिदाबाद में ऐसे मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा 11.01 लाख बताई गई, जबकि मालदा में यह आंकड़ा 8.28 लाख है। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर असहयोग के जरिए सीमा सुरक्षा में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सीमा पर बाड़बंदी राष्ट्रीय और राज्य सुरक्षा के लिए बे …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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