संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों की मांग काफी समय से चल रही है। इसी कड़ी में भारत सहित जी4 देशों ने एक बहुत ही बड़ा और अहम प्रस्ताव दुनिया के सामने रखा है। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान (जी4 देशों) ने सुरक्षा परिषद में बदलाव को लागू करने के लिए एक रास्ता सुझाया है। इस गुट ने साफ तौर पर कहा है कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की श्रेणी के भीतर कोई और उप-श्रेणी (सब-कैटेगरी) बिल्कुल नहीं बनाई जा सकती है। यह बयान दुनिया भर की राजनीति और संयुक्त राष्ट्र के भविष्य के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बदलाव की इस मुहिम में भारत एक प्रमुख और मजबूत आवाज बनकर उभरा है। जी4 देश चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जो नए देश स्थायी सदस्य बनें, उन्हें भी पुराने सदस्यों के बराबर ही अधिकार और शक्तियां मिलें। हालांकि, बातचीत को आगे बढ़ाने और आम सहमति बनाने के लिए जी4 देशों ने एक बड़ा समझौता भी पेश किया है। इस प्रस्ताव के तहत, विस्तारित सुरक्षा परिषद में शामिल होने वाले नए स्थायी सदस्य शुरुआत में 15 साल तक ‘वीटो’ पावर (विशेषाधिकार) का इस्तेमाल नहीं करेंगे। वीटो पावर के इस्तेमाल पर अंतिम फैसला 15 साल की एक लंबी समीक्षा (रिव्यू) अवधि के बाद लिया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि सुधार की रुकी हुई प्रक्रिया बिना किसी विवाद के तेजी से आगे बढ़ सके और कोई देश इसमें अड़ंगा न लगाए।संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने जी4 देशों की तरफ से यह महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार को सुरक्षा परिषद सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) की बैठक में इस गुट का पक्ष बहुत ही मजबूती के साथ रखा। भार …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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