भारत ने सिंधु जल समझौते पर अपना सख्त रूख बरकरार रखा है। पाकिस्तान एक ऐसे रास्ते से इस नदी का पानी हासिल करने की ताक में है, जिसे भारत ने मान्यता ही नहीं दी है। दरअसल, जिस न्यायाधिकरण (कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन) में 19 अगस्त 2016 से सिंधु नदी के जल को लेकर जिरह हो रही है, यहां भारत ने अपने प्रतिनिधि ही नहीं भेजे हैं। भारत ने साफ कर दिया है कि ऐसी कवायद का कोई अर्थ नहीं क्योंकि ऐसी अदालतों का गठन ही गैरकानूनी है। 2016 में शुरू इस कार्यवाही को 10 साल होने वाले हैं। लेकिन, भारत ने साफ कर दिया है कि कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता अदालत) जैसे रास्तों पर भले ही पाकिस्तान एड़ियां रगड़ता रहे, सिंधु जल हासिल करने की ऐसी जुगत का कोई फायदा नहीं होने वाला।बता दें कि पाकिस्तान ने पाकिस्तान ने 1960 की सिंधु जल संधि (अप्रैल, 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद निलंबित) के अनुच्छेद 2(ख) के तहत मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू करने की गुहार लगाई थी। भारत के खिलाफ की गई इस अपील को पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार कोई तवज्जो नहीं देती। खास तौर पर विदेश मंत्रालय ने बीते एक साल में कई बार साफ किया है कि जल संधि निलंबित होने के कारण ऐसी मध्यस्थता का कोई कानूनी वजूद ही नहीं।मध्यस्थता की कार्यवाही के माध्यम से सिंधु नदी का पानी हासिल करने की जुगत में लगे पाकिस्तान को लेकर भारत ने एक बार फिर कड़े फैसले से पूरी दुनिया को अवगत करा दिया है। विदेश मंत्रालय ने 15 मई को पारित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता अदालत) के फैसले को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह मध्यस्थता अदालत पूरी तरह से गैरकानूनी है।भारत ने साफ कर दिया है कि सिंधु जल समझौते पर जो रोक उसने लगाई थी, वह आगे भी जारी रहेगी। यह फैसला …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
बिन पानी सब सून: अवैध अदालत के सहारे पाकिस्तान 10 साल से मांग रहा सिंधु जल; 2026 में भारत ने फिर दिखाया आईना
भारत ने सिंधु जल समझौते पर अपना सख्त रूख बरकरार रखा है। पाकिस्तान एक ऐसे रास्ते से इस नदी का पानी हासिल करने की ताक में है, जिसे भारत ने मान्यता ही नहीं दी है। दरअसल, जिस न्यायाधिकरण (कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन) में 19 अगस्त 2016 से सिंधु नदी के जल को लेकर जिरह हो रही है, यहां भारत ने अपने प्रतिनिधि ही नहीं भेजे हैं। भारत ने साफ कर दिया है कि ऐसी कवायद का कोई अर्थ नहीं क्योंकि ऐसी अदालतों का गठन ही गैरकानूनी है। 2016 में शुरू इस कार्यवाही को 10 साल होने वाले हैं। लेकिन, भारत ने साफ कर दिया है कि कोर्ट