सरकार के प्रधान सचिव ने 13 मई को एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि रिकी राधन पंडित की ओएसडी के रूप में नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है। रिकी राधन पंडित न केवल एक ज्योतिषी हैं, बल्कि वे टीवीके पार्टी के प्रवक्ता भी हैं। चुनाव प्रचार के दौरान वे मुख्यमंत्री के बेहद करीबी सहयोगी रहे।इस नियुक्ति को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखे हमले किए थे। एआईएडीएमके (AIADMK) के राज्यसभा सांसद आईएस इनबदुरई ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि ज्योतिषी अपनी खुद की किस्मत का अंदाजा नहीं लगा पाए और विजय सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। वहीं, डीएमके (DMK) के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि एक ज्योतिषी केवल भविष्यवाणी कर सकता है, लेकिन सरकार चलाने के लिए नियमों और शक्तियों की समझ रखने वाले सलाहकार की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी पार्टी से ज्यादा ज्योतिषी पर भरोसा है।विधानसभा में भी इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ। डीएमके के सहयोगी दल एमजेके (MJK) के अध्यक्ष थमीमुन अंसारी ने कहा कि सरकार में ज्योतिष के फार्मूले शामिल नहीं होने चाहिए। व्यक्तिगत विश्वास अलग बात है, लेकिन इसे सरकारी कामकाज में नहीं लाना चाहिए। डीएमडीके (DMDK) की महासचिव प्रेमलता विजयकांत ने भी इस नियुक्ति की कड़ी निंदा की।इन विवादों के बीच, टीवीके सरकार ने बुधवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया। फ्लोर टेस्ट के दौरान सरकार को 144 विधायकों का समर्थन मिला। हालांकि पार्टी और उसके सहयोगियों के पास सदन में 120 विधायक थे, लेकिन एआईएडीएमके के बागी विधायकों के समर्थन से सरकार ने यह जीत हासिल की। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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