सुनवाई के 15वें दिया क्या मांग उठी? हिंदू धर्म को लेकर कोर्ट ने क्या टिप्पणी की? कोर्ट ने धार्मिक प्रथा और परंपरा को लेकर क्या कहा? यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने की। पीठ धार्मिक स्वतंत्रता, महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश और विभिन्न समुदायों की धार्मिक प्रथाओं से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर रही है। इनमें सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मामला और दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। संविधान पीठ में न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, एम एम सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी वराले, आर महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।सुनवाई के 15वें दिन जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, एक हस्तक्षेपकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. जी मोहन गोपाल ने अदालत के समक्ष कहा कि धार्मिक समुदायों के भीतर से सामाजिक न्याय की मांग उठ रही है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म को पहले एक धार्मिक श्रेणी के रूप में परिभाषित किया गया था और बाद में 1966 में एक फैसले में कहा गया कि हिंदू वह है, जो धर्म और दर्शन से जुड़े सभी मामलों में वेदों को सर्वोच्च मानता है।डॉ. गोपाल ने अदालत से कहा कि उन्होंने हमसे कभी नहीं पूछा। हममें से किसी ने भी ऐसा नहीं कहा। मुझे वेदों के प्रति सर्वोच्च सम्मान और गहरी श्रद्धा है, लेकिन क्या आज हर वह व्यक्ति जिसे हिंदू माना जाता है, वास्तव में वेदों को धर्म और दर्शन में सर्वोच्च मानता है? इस पर न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इसीलिए हिंदू धर्म को जीवन जीने का तरीका कहा जाता है। किसी हिंदू के लिए मंदिर जाना या कोई अनुष्ठान करना अनिवार् …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Sabarimala: 'हिंदू धर्म जीवन शैली है', सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आस्था साबित करने के लिए मंदिर जाना जरूरी नहीं
सुनवाई के 15वें दिया क्या मांग उठी? हिंदू धर्म को लेकर कोर्ट ने क्या टिप्पणी की? कोर्ट ने धार्मिक प्रथा और परंपरा को लेकर क्या कहा? यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने की। पीठ धार्मिक स्वतंत्रता, महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश और विभिन्न समुदायों की धार्मिक प्रथाओं से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर रही है। इनमें सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मामला और दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। संविधान पीठ में न्यायमूर्ति बी वी न