यूपी में करीब तीन महीने के चिंतन-मंथन के बाद सारे कयासों पर विराम लगाते हुए आखिरकार योगी-दो के कैबिनेट का दूसरा विस्तार संपन्न हो गया। इससे सरकार और भाजपा संगठन ने जहां जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को साधने की कोशिश की है, वहीं, 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से हिंदुत्व एजेंडे़ के जरिए जातीय गणित को भी साधा है। वहीं, इस संक्षिप्त विस्तार के सहारे में भाजपा सपा के पीडीए फार्मूला की काट तैयार कर विपक्ष के लिए तगड़ी घेरेबंदी की जमीन भी तैयार करेगी। 60 सदस्यीय कैबिनेट में अब सामान्य वर्ग के 21, अल्पसंख्यक वर्ग के 2 व अनुसूचित जनजाति वर्ग के एक मंत्री हो गए हैं। नए सदस्यों को शामिल करते हुए पूरे मंत्रिमंडल पर नजर डालें तो पाएंगे कि भाजपा सत्ताईस के संग्राम में जातियों की एकजुटता के सहारे हिंदुत्व की एकता को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने का भी संकेत छिपा है। पहली कोशिश जातियों की गणित साधते हुए हिंदुत्व को मजबूती देने की ही दिख रही। बिना कोई बड़ा उलटफेर किए जिस तरह मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ है और जिन चेहरों को शामिल किया गया है वह बताता है कि भाजपा नेतृत्व प्रदेश में विधानसभा के आगामी चुनाव में भरोसे और एकजुटता के संदेश के साथ उतरने का फैसला किया है।कुछ मंत्रियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं चलती रही हैं लेकिन पहले से मंत्रिमंडल में मौजूद किसी मंत्री को अगर छेड़ा नहीं गया है तो उसकी बड़ी वजह यही है कि भाजपा ऐसा करके यह संदेश देने की कोशिश किया है कि मंत्रिमंडल में कुछ गड़बड़ नहीं है और विपक्ष के ऐसे सभी आरोप गलत है।भाजपा ने विस्तार के जरिये यह भी संदेश देने की कोशिश है कि नए चेहरों के जरिए जहां पीडीए की काट तैयार की गई है, वहीं, मनोज पाण्डेय को शामिल कर ब्र …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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