राहुल गांधी के करीबी श्रीवत्स ने एक्स पर जानकारी दी कि इस रील को एक घंटे से भी कम समय में 12 मिलियन व्यूज मिल चुके थे। वहीं, फोटो पोस्ट करीब 46 मिलियन लोगों तक पहुंच चुकी थी। श्रीवत्स का आरोप है कि मेटा ने ब्लॉक करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया। उन्होंने इसे सीधे तौर पर आईटी नियमों का असर बताया। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी की सोशल मीडिया पहुंच को लंबे समय से दबाया जा रहा है। उनके यूट्यूब व्यूज और फॉलोअर्स को भी निशाना बनाया जा रहा है।दूसरी ओर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार, इंस्टाग्राम के अपने आंतरिक सिस्टम ने गलती से इन पोस्ट्स को ब्लॉक कर दिया था। यह एक ऑटोमेटेड सिस्टम की चूक थी, जिसे अब ठीक कर लिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के नेता की आवाज दबाने का दावा पूरी तरह गलत है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास बता रही है। वहीं, सरकार इसे महज एक तकनीकी ग्लिच करार दे रही है। खबर है कि अब पोस्ट को बहाल कर दिया गया है, लेकिन डाटा और रीच को लेकर बहस थमने का नाम नहीं ले रही है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निष्पक्षता पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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