कंपनियों के अधिकारियों ने हालिया तिमाही नतीजों के दौरान संकेत दिया कि वे पहले ही तीन से पांच फीसदी तक कीमतें बढ़ा चुके हैं। लागत का दबाव बने रहने पर आगे भी वृद्धि हो सकती है। कंपनियों का कहना है कि ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने से कच्चे माल, लॉजिस्टिक्स व पैकेजिंग लागत बढ़ी है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने भी दबाव बढ़ाया है। इसका असर खाद्य उत्पादों, सौंदर्य प्रशाधन, पेय पदार्थ व घरेलू उपयोग के सामान सहित कई क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है।कंपनियां लागत के दबाव से निपटने और मुनाफा बनाए रखने के लिए पैकेट बंद उत्पादों में मात्रा घटाने की रणनीति भी अपना रही हैं। इसके अलावा, छूट एवं प्रचार खर्चों में कटौती, भंडार प्रबंधन को मजबूत करने और आपूर्ति शृंखला को अधिक कुशल बनाया जा रहा है। इसके बावजूद, उपभोक्ताओं पर बढ़ती लागत का बोझ पड़ने की आशंका है। हालांकि 5, 10 और 15 रुपये वाले छोटे पैक बाजार में बनाए रखने की कोशिश है, ताकि बिक्री पर असर कम पड़े।हिंदुस्तान यूनिलीवर लि. के मुख्य वित्त अधिकारी निरंजन गुप्ता ने कहा, हम पर महंगाई का 8 से 10% का बोझ पड़ा है। हमने कीमतों में 2% से 5% तक की वृद्धि की है। अगर कमोडिटी की कीमतों में दबाव बना रहा, तो कंपनी आगे और दाम बढ़ा सकती है। डाबर इंडिया के वैश्विक सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा, कंपनी चालू वित्त वर्ष में 10% महंगाई का सामना कर रही है। कंपनी विभिन्न श्रेणियों में 4% तक दाम बढ़ा चुकी है। लागत नियंत्रण के उपाय भी कर रही है।ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के सीईओ रक्षित हरगेव ने कहा, ईंधन और पैकेजिंग लागत में करीब 20 फीसदी वृद्धि हुई है। कंपनी सीधे दाम बढ़ाने और पैकेट के वजन घटाने दोनों विकल्पों पर विचार …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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