पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर क्या बोले? चीन और अमेरिकी व्यवस्था का किया जिक्र भारत का रास्ता अमेरिका और चीन जैसा नहीं होगा ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का किया जिक्र एआई पर चल रही बहस पर क्या बोले? हालिया पश्चिम एशिया संघर्ष और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए अदाणी ने कहा कि अब ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा अलग-अलग विषय नहीं रह गए हैं। ये दोनों मिलकर राष्ट्रीय शक्ति की नई धुरी बन चुके हैं। उनके मुताबिक, जो देश अपनी ऊर्जा व्यवस्था को नियंत्रित करेगा, वही औद्योगिक भविष्य को दिशा देगा। वहीं जो देश कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमता पर नियंत्रण रखेगा, वही दुनिया के इंटेलिजेंस फ्यूचर का नेतृत्व करेगा।अदाणी ने कहा कि 1947 में भारत ने राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल की थी, लेकिन 21वीं सदी में सच्ची आजादी का अर्थ होगा अपने घरों को रोशन करने वाली ऊर्जा और अपने भविष्य को दिशा देने वाली तकनीक पर खुद का नियंत्रण। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन इस नई वैश्विक रणनीति को अच्छी तरह समझ चुके हैं। दोनों देशों की राजनीतिक व्यवस्थाएं अलग हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समान है ऊर्जा और तकनीकी क्षमता में आत्मनिर्भरता हासिल करना।उन्होंने कहा कि कोई भी देश तब तक पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं कहा जा सकता, जब तक वह अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने वाली ऊर्जा और अपने भविष्य को आकार देने वाली तकनीक के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हो।भारत के विकास मॉडल पर बोलते हुए अदाणी ने कहा कि भारत का रास्ता अमेरिका या चीन जैसा नहीं होगा। भारत की ताकत इसकी घरेलू मांग और तेजी से बढ़ता सामाजिक-आर्थिक ढांचा है। उन्होंने कहा कि देश में मध्यम वर्ग तेजी से बढ़ रहा है, शहरों का विस् …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें