उन्होंने अपने पत्र में कहा कि 1 मई को सरकार ने ‘ग्रेट निकोबार परियोजना: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न’ जारी कर दावा किया था कि परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का व्यापक अध्ययन किया गया है और उन्हें प्रभावी तरीके से मैनेज किया जा रहा है। जयराम रमेश ने कहा कि उन्होंने 3 मई को इन पूछे जाने वाले प्रश्न का जवाब दिया था, लेकिन अब वे कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखना चाहते हैं।जयराम रमेश ने कहा कि कानून के मुताबिक अंडमान-निकोबार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बनने वाले बड़े पोर्ट प्रोजेक्ट्स के लिए व्यापक ईआईए जरूरी होता है। इसके तहत कम से कम तीन मौसमों का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि पर्यावरण और जैव विविधता पर पड़ने वाले असर का सही आकलन हो सके। उन्होंने 3 नवंबर 2009 के पर्यावरण मंत्रालय के ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला देते हुए कहा कि 50 लाख टन प्रति वर्ष से बड़े पोर्ट प्रोजेक्ट्स के लिए व्यापक ईआईए, गणितीय मॉडलिंग और जमीनी सत्यापन अनिवार्य है।जयराम रमेश ने कहा कि मंत्रालय की क्षेत्र-विशिष्ट ईआईए नियमावली भी कम से कम दो मौसमों के भौतिक, रासायनिक और जैविक आधारभूत डेटा की मांग करती है। उन्होंने दावा किया कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट में इन मानकों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इसरो की 2021 मैपिंग में गलाथिया बे के बड़े हिस्से को इरोजन जोन बताया गया था। ऐसे में तटीय विनियमन क्षेत्र नियमों के तहत और ज्यादा विस्तृत अध्ययन जरूरी था।जयराम रमेश ने दावा किया कि ग्रेट निकोबार परियोजना की फाइनल ईआईए रिपोर्ट खुद यह स्वीकार करती है कि आधारभूत अध्ययन सिर्फ दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 तक यानी केवल एक मौसम में की गई थीं। उन्होंने कहा कि परिस्थितिकी और जैव विविधता …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Congress: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर जयराम रमेश ने पर्यावरण मंत्रालय को लिखा पत्र, बोले-ईआई प्रक्रिया मजाक बनी
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि 1 मई को सरकार ने 'ग्रेट निकोबार परियोजना: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न' जारी कर दावा किया था कि परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का व्यापक अध्ययन किया गया है और उन्हें प्रभावी तरीके से मैनेज किया जा रहा है। जयराम रमेश ने कहा कि उन्होंने 3 मई को इन पूछे जाने वाले प्रश्न का जवाब दिया था, लेकिन अब वे कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखना चाहते हैं।जयराम रमेश ने कहा कि कानून के मुताबिक अंडमान-निकोबार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बनने वाले बड़े पोर्ट प्रोजेक्ट्स के लिए