इस हाई-प्रोफाइल बैठक में केरल कांग्रेस के कई कद्दावर नेता शामिल हुए, जिनमें वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्नितला प्रमुख हैं। यह बैठक राज्य में कांग्रेस के मजबूत प्रदर्शन के बाद नेतृत्व परिवर्तन को अंतिम रूप देने के खास उद्देश्य से बुलाई गई थी। हालांकि, लंबी चर्चा और लगातार विचार-विमर्श के बावजूद फैसला सार्वजनिक नहीं किया जा सका, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि पार्टी के अंदर अभी और भी आंतरिक बातचीत होनी बाकी है। अब यह पूरा मामला दिल्ली दरबार यानी आलाकमान के हाथों में चला गया है और मुख्यमंत्री चुनने का अंतिम फैसला पूरी तरह से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ दिया गया है। बैठक के बाद सभी बड़े नेता कुछ समय के लिए फिर खरगे के आवास लौटे और बाद में वहां से रवाना हो गए।राज्य के सभी नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायकों ने मिलकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाया है और अपनी तरफ से गेंद आलाकमान के पाले में डाल दी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की केरल प्रभारी दीपा दासमुंशी ने जानकारी दी है कि सभी कांग्रेस विधायकों ने एक पंक्ति के प्रस्ताव (वन-लाइन रेजोल्यूशन) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस प्रस्ताव के जरिए विधायकों ने राज्य के नए मुख्यमंत्री का चुनाव करने का पूरा अधिकार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी हाईकमान को सौंप दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब विधायक दल की तरफ से मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कोई आपसी खींचतान या विवाद नहीं होगा।विधायकों का प्रस्ताव मिलने के बाद अब मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर दिल्ली से ही लगेगी। दीपा दासमुंशी ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी इस मामले में अंतिम निर्णय लेंगे। ये …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
केरल में सीएम को लेकर फंसा पेच: खरगे के आवास पर तीन घंटे हुई बैठक, फिर भी नहीं बन सकी सहमति
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में केरल कांग्रेस के कई कद्दावर नेता शामिल हुए, जिनमें वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्नितला प्रमुख हैं। यह बैठक राज्य में कांग्रेस के मजबूत प्रदर्शन के बाद नेतृत्व परिवर्तन को अंतिम रूप देने के खास उद्देश्य से बुलाई गई थी। हालांकि, लंबी चर्चा और लगातार विचार-विमर्श के बावजूद फैसला सार्वजनिक नहीं किया जा सका, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि पार्टी के अंदर अभी और भी आंतरिक बातचीत होनी बाकी है। अब यह पूरा मामला दिल्ली दरबार यानी आलाकमान के हाथों में चला गया है और मुख्य