व्यापार अधिनियम कानून क्यों बनाया गया था? ट्रंप क्या साबित करने में विफल रहे? अदलात ने क्या दी चेतावनी? ट्रंप के पुराने टैरिफ को कोर्ट ने किया था खारिज कैसे आया यह मामला सामने? ट्रंप पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने 2-1 के फैसले में कहा कि ट्रंप प्रशासन 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का इस्तेमाल व्यापक व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे के आधार पर नहीं कर सकता। अदालत के मुताबिक, यह कानून 1970 के दशक की विशेष बैलेंस ऑफ पेमेंट्स यानी भुगतान संतुलन संकट से निपटने के लिए बनाया गया था, न कि आधुनिक दौर के सामान्य व्यापार घाटे के लिए।जज मार्क ए. बार्नेट और क्लेयर आर. केली ने अपने फैसले में कहा कि ट्रंप की घोषणा यह साबित करने में विफल रही कि कानून के जरिए आवश्यक शर्तें पूरी हुई हैं। बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में ये टैरिफ लगाए थे।अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि अगर राष्ट्रपति को इतनी व्यापक व्याख्या की अनुमति दे दी जाए, तो उन्हें लगभग असीमित टैरिफ लगाने की शक्ति मिल जाएगी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना संवैधानिक सवाल खड़ा कर सकता है, क्योंकि टैरिफ और व्यापार नीति तय करने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है।दरअसल, इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की पहले वाली टैरिफ व्यवस्था को भी खारिज कर दिया था, जिसे उन्होंने आपातकालीन शक्तियों वाले कानून के तहत लागू किया था। इसके बाद फरवरी में ट्रंप ने धारा 122 का इस्तेमाल करते हुए नया टैरिफ लागू किया। यह प्रावधान राष्ट्रपति को अधिकतम 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत तक अस्थायी आयात शुल्क लगाने की अनुमति देता है।ट्रंप प्रशासन ने दावा किया था कि अमेरिका के बड़े …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
ट्रंप को बड़ा झटका!: अमेरिकी अदालत ने खारिज किया नया टैरिफ आदेश, कहा- व्यापार कानून का हुआ गलत इस्तेमाल
व्यापार अधिनियम कानून क्यों बनाया गया था? ट्रंप क्या साबित करने में विफल रहे? अदलात ने क्या दी चेतावनी? ट्रंप के पुराने टैरिफ को कोर्ट ने किया था खारिज कैसे आया यह मामला सामने? ट्रंप पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने 2-1 के फैसले में कहा कि ट्रंप प्रशासन 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का इस्तेमाल व्यापक व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे के आधार पर नहीं कर सकता। अदालत के मुताबिक, यह कानून 1970 के दशक की विशेष बैलेंस ऑफ पेमेंट्स यानी भुगतान संतुलन संकट से निपटने क