मध्य बंगाल के जंगल महल क्षेत्र (पुरुलिया, बांकुरा और झारग्राम) में भी टीएमसी का पूरी तरह सफाया हो गया। पुरुलिया की 9, बांकुरा की 12 और झारग्राम की 4 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की। विशेषज्ञों का कहना है कि कुड़मी-महतो समुदाय के वोट इस बार भाजपा की ओर चले गए, क्योंकि अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने में देरी से उनमें नाराजगी थी। इससे टीएमसी को नुकसान हुआ। भाजपा ने इस समुदाय से जुड़े नेताओं को उम्मीदवार बनाया, जिससे उसे फायदा मिला।इसके अलावा, आदिवासी वोटों का बंटवारा, रोजगार की कमी के कारण पलायन, टीएमसी में अंदरूनी गुटबाजी और उम्मीदवारों के चयन को लेकर असंतोष भी पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण बने।पश्चिम बर्धमान जिले में भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी नौ सीटों पर कब्जा कर लिया। उसने 2021 में टीएमसी द्वारा जीती गई 6 सीटें छीन लीं और बाकी 3 सीटें भी बरकरार रखीं। स्थानीय टीएमसी कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुछ नेताओं के अहंकार और जनता की सेवा की बजाय निजी लाभ पर ध्यान देने से पार्टी की छवि खराब हुई। टीएमसी के पूर्व नेता जितेंद्र तिवारी ने कहा कि जनता ने यह जनादेश ‘बंगाल में फिर से उद्योग लाने, रोजगार बढ़ाने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने’ के लिए दिया है। जितेंद्र तिवारी अब भाजपा में हैं और इस बार चुनाव जीत गए हैं। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Election Analysis: बंगाल के 23 में से नौ जिलों में खाता नहीं खोल पाई TMC; भाजपा ने किस तरह मतदाताओं को साधा?
मध्य बंगाल के जंगल महल क्षेत्र (पुरुलिया, बांकुरा और झारग्राम) में भी टीएमसी का पूरी तरह सफाया हो गया। पुरुलिया की 9, बांकुरा की 12 और झारग्राम की 4 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की। विशेषज्ञों का कहना है कि कुड़मी-महतो समुदाय के वोट इस बार भाजपा की ओर चले गए, क्योंकि अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने में देरी से उनमें नाराजगी थी। इससे टीएमसी को नुकसान हुआ। भाजपा ने इस समुदाय से जुड़े नेताओं को उम्मीदवार बनाया, जिससे उसे फायदा मिला।इसके अलावा, आदिवासी वोटों का बंटवारा, रोजगार की कमी के कारण पलायन, टीए