यह राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट है, जहां तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सीधा और कांटे का मुकाबला बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से है। शुभेंदु और ममता 2021 में भी आमने-सामने थे। तब ममता शुभेंदु के गढ़ नंदीग्राम में चुनाव लड़ने पहुंचीं थीं। जहां उन्हें हार मिली थी।उत्तर बंगाल की इस अस्थिर सीट पर टीएमसी के उदयन गुहा और भाजपा के अजय रॉय के बीच टक्कर है। यह अहम इसलिए है क्योंकि 2021 के चुनाव में यहां हार-जीत का अंतर महज 57 वोटों का रहा था। तब भाजपा के नीशीथ प्रमाणिक ने टीएमसी के उदयन गुहा को मात दी थी। 2007 के भूमि विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रही इस सीट पर भाजपा के शुभेंदु अधिकारी का सामना टीएमसी के पवित्र कर से है। 2021 के चुनाव में शुभेंदु ने इस सीट पर खुद को चुनौती पेश करने आईं ममता बनर्जी को चुनाव हरा दिया था।यह अल्पसंख्यक बहुल सीट है, जहां आईएसएफ के मौजूदा विधायक नौशाद सिद्दीकी को टीएमसी के शौकत मोल्ला कड़ी चुनौती दे रहे हैं। पिछली बार टीएमसी का जोर होने के बावजूद नौशाद ने यह सीट जीती थी।संदेशखाली में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा संघर्ष है, जबकि आसनसोल दक्षिण में औद्योगिक गिरावट और बेरोजगारी के बीच भाजपा की अग्निमित्रा पॉल और टीएमसी के तापस बनर्जी आमने-सामने हैं। 7. खड़गपुर सदर: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष यहां से अपनी वापसी की कोशिश कर रहे हैं। उनका कड़ा मुकाबला टीएमसी के प्रदीप सरकार से है, जिन्होंने 2019 के उपचुनाव में यह सीट जीती थी। हालांकि, 2021 के चुनाव में यहां से भाजपा के हिरंमय चट्टोपाध्याय ने प्रदीप सरकार को मात दी थी। 8. नौदा और रेजिनगर: इन दोनों सीटों से हुमायूं कबीर मैदान में हैं। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें