नेपाल ने भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे से आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करने की योजना पर रविवार को आपत्ति जताई है। नेपाल का दावा है कि यह इलाका काठमांडू के अधिकार क्षेत्र में आता है। सरकार ने कहा है कि उसने इस संबंध में अपनी स्थिति भारत और चीन दोनों को कूटनीतिक माध्यमों से अवगत करा दिया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर नेपाल की यह आपत्ति भारत द्वारा यात्रा के जून और अगस्त के बीच आयोजित होने की घोषणा के कुछ दिनों बाद आई है। नेपाल के दावे को विदेश मंत्रालय ने किया खारिज इस पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि इस मामले में भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट और एक जैसा रहा है। उन्होंने बताया कि लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पारंपरिक रास्ता रहा है और कई दशकों से इसी मार्ग से यात्रा होती आ रही है, इसलिए इसमें कुछ भी नया नहीं है। उन्होंने नेपाल के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत ऐसे क्षेत्रीय दावों को न तो सही मानता है और न ही ये ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एकतरफा तरीके से सीमा का विस्तार दिखाना स्वीकार्य नहीं है। इसके साथ ही भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह नेपाल के साथ सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है। सीमा से जुड़े लंबित विवादों को भी आपसी संवाद और कूटनीति के जरिए सुलझाने की बात कही गई है। — MOFA of Nepal 🇳🇵 (@MofaNepal) May 3, 2026 बता दें कि नेपाल इससे पहले भी लिपुलेख को अपना हिस्सा बताता रहा है। उसने पिछले साल कुछ नक्शे जारी किए थे, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था, जबकि ये तीनों इलाके भारतीय सीमा में आते हैं। 4 …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
कैलाश मानसरोवर यात्रा: बालेन सरकार की आपत्ति को MEA ने किया खारिज, लिपुलेख दर्रे को बताया था नेपाल का हिस्सा
नेपाल ने भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे से आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करने की योजना पर रविवार को आपत्ति जताई है। नेपाल का दावा है कि यह इलाका काठमांडू के अधिकार क्षेत्र में आता है। सरकार ने कहा है कि उसने इस संबंध में अपनी स्थिति भारत और चीन दोनों को कूटनीतिक माध्यमों से अवगत करा दिया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर नेपाल की यह आपत्ति भारत द्वारा यात्रा के जून और अगस्त के बीच आयोजित होने की घोषणा के कुछ दिनों बाद आई है। नेपाल के दावे को विदेश मंत्रालय ने किया खारिज इस पर भारत के विदे